

इंदौर में जल संकट की बैठक से 9 में से 5 विधायक नदारद।
मालिनी गौड़ बोलीं- काम नहीं होते तो बैठक में जाने का क्या फायदा।
कैबिनेट बैठक छोड़ इंदौर में जल संकट पर मंथन कर रहे थे कैलाश विजयवर्गीय।
मोहन यादव और कैलाश विजयवर्गीय के बीच सियासी खींचतान की अटकलें तेज।
MP BJP Internal Conflict Explainer: जल संकट जैसे अहम जनहित के मुद्दे पर बुलाई गई बैठक में विधायकों की गैरमौजूदगी, नेताओं के अलग-अलग कार्यक्रम और पुराने राजनीतिक घटनाक्रम एक बार फिर चर्चा में हैं। इन घटनाओं ने भाजपा के भीतर समन्वय और स्थानीय नेतृत्व के समीकरणों को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं।
दरअसल इंदौर में जिस दिन कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक आयोजित की उसी दिन भोपाल में केबिनेट की बैठक आयोजित की गयी थी, कैलाश विजयवर्गीय केबिनेट की बैठक में शामिल न होते हुए इंदौर में बैठक कर रहे थे, और उसी बैठक में वो विधायक भी शामिल नही हुए जो सीएम के हर दौरे में इंदौर में उनके साथ रहते है, इस लेकर राजनितिक गलियारों में चर्चाये है, लेकिन इसके पहले भी कई बार कैलाश विजयवर्गीय सीएम से अपनी नराजगी व्यक्त कर चुके है।
इंदौर में जल संकट से निपटने के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की ओर से बुलाई गई बैठक राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गई। बैठक में नौ में से पांच विधायकों के शामिल नहीं होने और कई जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े कर दिए। पानी जैसे अहम मुद्दे पर बुलाई गई बैठक में जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को लेकर सियासी गलियारों में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। सवाल यह भी है कि क्या यह महज व्यस्तता का मामला था या इसके पीछे पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान की कोई भूमिका है
भाजपा विधायक ने खुलकर कहा कि लगातार कहने के बावजूद काम नहीं होते तो बैठक में जाने का क्या फायदा। यह टिप्पणी प्रशासनिक कामकाज और जनप्रतिनिधियों की अपेक्षाओं के बीच तालमेल की कमी की ओर इशारा कर रही थी, लेकिन इस दौरा मालिनी गौड़ ने रेसीडेंसी में सीएम से जाकर मुलाकात की, यानी की कैलाश की बैठक में न जाने का कारण सीएम से मुलाकात करने का कारण बन गया
इस पूरे घटनाक्रम में एक और पहलू चर्चा में है। जिस दिन कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में जल संकट को लेकर बैठक कर रहे थे, उसी दिन भोपाल में कैबिनेट की बैठक भी आयोजित हुई थी। जानकारी के मुताबिक, इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय के विभाग से संबंधित समीक्षा का विषय भी शामिल था। कैबिनेट के कई मंत्री भोपाल में मौजूद थे, जबकि कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में बैठक कर रहे थे। इसी वजह से राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल कार्यक्रमों का टकराव था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैलाश विजयवर्गीय के बीच मतभेदों की चर्चाएं नई नहीं हैं। जुलाई 2026 में भी मुख्यमंत्री के नाम लिखे गए एक कथित पत्र के वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मची थी। इस पत्र को लेकर कैलाश विजयवर्गीय का नाम चर्चा में आया था, लेकिन उन्होंने इसे अपने द्वारा लिखा गया पत्र स्वीकार नहीं किया था।
सितंबर 2026 में इंदौर के एक कार्यक्रम के दौरान कैलाश विजयवर्गीय की ओर से मंच से की गई टिप्पणी भी चर्चा में रही थी। इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग अर्थ निकाले गए और इसे भाजपा के भीतर चल रहे समीकरणों से जोड़कर देखा गया। इस दौरान भी यह सवाल खड़े हुए थे की क्या पार्टी के भीतर सब सही चल रहा है
हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर दौरे पर पहुंचे और उन्होंने शहर में रात्रि विश्राम किया। इस दौरान रेसीडेंसी कोठी पर मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के लिए पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, भाजपा के विधायक और स्थानीय नेता पहुंचे लेकिन इस मुलाकात के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बन गई। मुख्यमंत्री से मिलने के लिए भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच कैलाश विजयवर्गीय का वहां नहीं पहुंचना राजनीतिक चर्चाओं को हवा देने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है।
इंदौर शहर की जल संकट बैठक में विधायकों की अनुपस्थिति, कामकाज को लेकर कथित नाराजगी, भोपाल की कैबिनेट बैठक और मुख्यमंत्री के इंदौर दौरे के दौरान कैलाश विजयवर्गीय की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े किए हैं। इन घटनाक्रमों को एक साथ रखकर देखने पर भाजपा के भीतर समन्वय और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है।
अब इंदौर की जल संकट बैठक से लेकर मुख्यमंत्री के दौरे तक सामने आए घटनाक्रमों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच राजनीतिक तालमेल को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच दूरी या मतभेद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों ने सियासी अटकलों को जरूर हवा दी है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या यह महज संयोग है या भाजपा के भीतर कोई राजनीतिक समीकरण बदल रहा है।