

Indore Property Tax Name Transfer Case : इंदौर नगर निगम के संपत्तिकर रिकॉर्ड में कथित नामांतरण गड़बड़ी का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर नगर निगम इस पूरे प्रकरण की जांच में जुटा है, वहीं कांग्रेस ने इसे करोड़ों रुपये का कथित नामांतरण घोटाला बताते हुए महापौर और निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने पूरे मामले की लोकायुक्त से जांच कराने की मांग की है। दूसरी ओर नगर निगम का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, जनवरी से मार्च के बीच रात 10 बजे से सुबह 3 बजे के दौरान करीब 370 संपत्तिकर खातों में मालिकों के नाम बदले जाने का मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद नगर निगम में हड़कंप मच गया। राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने बताया कि करीब दो महीने पहले ही इस मामले की जांच के लिए पत्र लिखा गया था और फिलहाल पूरे प्रकरण की तकनीकी एवं दस्तावेजी जांच जारी है।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में दो उपायुक्तों की लॉगिन आईडी से देर रात रिकॉर्ड में बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित लॉगिन आईडी का उपयोग किसने किया और नामांतरण की प्रक्रिया वैधानिक नियमों के अनुरूप हुई या नहीं। निगम प्रशासन इस पहलू की भी जांच कर रहा है।
निरंजन सिंह चौहान ने कहा कि नगर निगम किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि जांच में रिकॉर्ड से छेड़छाड़, फर्जी दस्तावेज या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उधर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया कि बिना वैध दस्तावेजों के करीब 370 संपत्तियों का नामांतरण किया गया है, जिससे करोड़ों रुपये की अनियमितता हुई। उन्होंने इस पूरे मामले के लिए नगर निगम प्रशासन और महापौर को जिम्मेदार ठहराते हुए लोकायुक्त से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
कांग्रेस का आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह पूरा मामला हुआ है और जांच के नाम पर दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल नगर निगम की जांच जारी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि रिकॉर्ड में बदलाव नियमानुसार हुआ था या फिर किसी स्तर पर अनियमितता हुई है।