लेडी ऑफ़ जस्टिस की जगह देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा लगाने की मांग, इंदौर बार एसोसिएशन ने भेजा प्रस्ताव

Legal News:इंदौर जिला अभिभाषक संघ ने देशभर के न्यायालयों में पारंपरिक लेडी ऑफ जस्टिस की प्रतिमाओं के स्थान पर लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग उठाई है।
Indore Bar Association members submit a memorandum demanding installation of Ahilyabai Holkar statues in Indian courts instead of the traditional Lady of Justice symbol.
इंदौर जिला न्यायालय (फोटो सोर्स - नवभारत )
Updated on

Indore Bar Association Demands: इंदौर जिला बार एसोसिएशन ने देश की न्यायपालिका से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। संघ ने मांग की है कि देशभर के न्यायालयों में स्थापित पारंपरिक लेडी ऑफ जस्टिस की प्रतिमाओं के स्थान पर लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमाएं स्थापित की जाएं। अधिवक्ताओं का मानना है कि भारतीय न्याय व्यवस्था का प्रतीक भारत की अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा होना चाहिए।

प्रशासनिक न्यायमूर्ति को सौंपा ज्ञापन

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पाल के नेतृत्व में कार्यकारिणी और बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने प्रशासनिक न्यायमूर्ति को ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, भारत के सर्वोच्च न्यायालय तथा राज्य अधिवक्ता परिषद को भी पत्र भेजकर इस मांग पर विचार करने का अनुरोध किया गया है।

अहिल्याबाई को बताया न्याय और सुशासन का प्रतीक

अधिवक्ताओं का कहना है कि मालवा की महान शासक देवी अहिल्याबाई होलकर ने अपने शासनकाल में निष्पक्ष, पारदर्शी और मानवीय न्याय व्यवस्था की मिसाल पेश की थी। उन्होंने बिना किसी भेदभाव के न्याय किया और सुशासन की ऐसी परंपरा स्थापित की, जिसे आज भी आदर्श माना जाता है। इसी कारण उन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था का उपयुक्त प्रतीक बताया जा रहा है।

स्वदेशी न्यायिक पहचान की मांग

बार एसोसिएशन का तर्क है कि वर्तमान में न्यायालयों में प्रयुक्त लेडी ऑफ जस्टिस की अवधारणा ब्रिटिश और रोमन परंपरा से जुड़ी हुई है, जबकि भारत की अपनी समृद्ध न्यायिक विरासत रही है। ऐसे में न्यायालयों में देवी अहिल्याबाई की प्रतिमाएं स्थापित करने से भारतीय संस्कृति, न्यायिक मूल्यों और स्वदेशी पहचान को सम्मान मिलेगा।

यह भी पढें:

सरकार और न्यायपालिका से सकारात्मक निर्णय की अपील

अभिभाषक संघ ने केंद्र सरकार और न्यायपालिका से इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे न्याय व्यवस्था के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा भारतीय न्याय परंपरा को नई पहचान मिलेगी।

Navbharat Live
navbharatlive.com