इंदौर का 'करोड़पति भिखारी': चिल्लर से बनाया साम्राज्य, 3 आलीशान मकान और कार, ठाठ-बाठ देख अधिकारी दंग

Indore Millionaire Beggar: इंदौर में भीख मांगने वाले मांगीलाल की जब जांच हुई तो वह करोड़पति निकला। उसके पास शहर में तीन आलीशान मकान, तीन ऑटो और घूमने के लिए निजी ड्राइवर के साथ लग्जरी कार है।
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इंदौर का करोड़पति भिखारी मांगीराम, फोटो- सोशल मीडिया
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Indore Beggar Free Campaign: मध्य प्रदेश के इंदौर में भिक्षावृत्ति मुक्त अभियान के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सराफा बाजार में पटिए वाली गाड़ी पर भीख मांगने वाला एक दिव्यांग भिखारी असल में करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला, जिसके ठाठ-बाट देखकर प्रशासनिक अधिकारी भी दंग रह गए।

इंदौर को भिक्षुक मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत शनिवार को सराफा क्षेत्र से मांगीलाल नामक एक दिव्यांग भिखारी का रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू दल के नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि मांगीलाल पिछले कई वर्षों से सराफा क्षेत्र में घूम-घूम कर भीख मांग रहा था। जब टीम ने उसकी पृष्ठभूमि की जांच की, तो सामने आया कि लोगों द्वारा दी गई चिल्लर से उसने करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली है। वह दिन में सराफा के खरीदारों और रात में चौपाटी घूमने आने वाले पर्यटकों से भीख मांगकर अपना गुजारा करता था।

तीन आलीशान मकान और निजी ड्राइवर का शौक

जांच के दौरान पता चला कि मांगीलाल के पास इंदौर शहर के अलग-अलग इलाकों में तीन पक्के मकान हैं। इसमें भगत सिंह नगर में 16x45 फीट का एक तीन मंजिला मकान और शिवनगर में 600 स्क्वायर फीट का दूसरा पक्का मकान शामिल है। इसके अतिरिक्त, उसे रेड क्रॉस सोसायटी के माध्यम से दिव्यांगता श्रेणी के तहत अलवास में एक 10x20 फीट का 1-BHK मकान भी मिला हुआ है। आश्चर्य की बात यह है कि शहर से बाहर आने-जाने के लिए मांगीलाल ने एक डिजायर कार ले रखी है और उसे चलाने के लिए एक निजी ड्राइवर भी रखा है, जिसे वह हर महीने 10 से 12 हजार रुपये वेतन देता है।

भीख के पैसों से चलता है ब्याज का बड़ा धंधा

मांगीलाल केवल भीख पर निर्भर नहीं है, बल्कि उसने सराफा क्षेत्र के व्यापारियों के बीच ब्याज का एक संगठित कारोबार भी फैला रखा है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह भीख से मिलने वाली रकम को व्यापारियों को ब्याज पर देता है और उसका ब्याज वसूलने के लिए ही वह रोजाना सराफा आता है। वह एक दिन और एक सप्ताह के हिसाब से ब्याज वसूलता है।, उसका कहना है कि वह किसी से जबरदस्ती पैसे नहीं मांगता, बल्कि लोग उसकी दिव्यांगता देखकर खुद ही पैसे दे देते हैं।

तीन ऑटो और रोजाना की मोटी कमाई

मांगीलाल के आय के स्रोतों में केवल ब्याज और भीख ही शामिल नहीं है। उसके पास तीन ऑटो रिक्शा भी हैं जो शहर में किराए पर चलते हैं, और उनसे मिलने वाला किराया सीधे उसकी जेब में जाता है। भीख से होने वाली उसकी रोजाना की कमाई के बारे में अधिकारियों का अनुमान है कि वह प्रतिदिन 500 से 1000 रुपये तक इकट्ठा कर लेता है। वह फिलहाल अलवास में अपने माता-पिता के साथ रहता है, जबकि उसके दो भाई अलग रहते हैं।

इंदौर को भिखारी मुक्त बनाने का महा-अभियान

जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा के अनुसार, इंदौर प्रशासन भिक्षावृत्ति को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है। यह अभियान 2024 में शुरू हुआ था, जिसके प्रारंभिक सर्वे में शहर में 6500 भिक्षुक सामने आए थे। अब तक लगभग 4500 भिक्षुकों की काउंसलिंग कर उनकी भिक्षावृत्ति छुड़वाई गई है और 1600 को पुनर्वास के लिए उज्जैन के आश्रम भेजा गया है। प्रशासन ने न केवल रेस्क्यू किया है, बल्कि 172 भिक्षुक बच्चों का स्कूलों में प्रवेश भी कराया है ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

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