

Gwalior Police Case: ग्वालियर में पुलिस विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश सुनील दंडोतिया के आदेश के बाद तत्कालीन ग्वालियर एसपी राजेश सिंह चंदेल, ठाटीपुर थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव, एसआई अजय सिंह सिकरवार और साइबर आरक्षक संतोष वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। ये कार्रवाई डकैती, लूट और आपराधिक साजिश के मामले में की गई है। वर्तमान में राजेश सिंह चंदेल भोपाल ग्रामीण में डीआईजी पद पर पदस्थ हैं।
मामला ठाटीपुर थाना क्षेत्र का है, जहां परिवादी अनूप राणा ने पुलिसकर्मियों पर लाखों रुपए की अवैध वसूली, धमकी और झूठे केस में फंसाकर जेल भेजने के गंभीर आरोप लगाए हैं। कोर्ट ने 11 मई को परिवाद स्वीकार करते हुए केस दर्ज करने का आदेश दिया।
परिवाद के अनुसार, 420 के एक मामले में समझौता कराने के नाम पर पुलिस ने पहले 5 लाख 80 हजार रुपए लिए। इसके बाद अनूप राणा और उसके परिजनों को थाने बुलाकर करीब 25 लाख रुपए और मंगवाए गए। आरोप है कि पैसे लेने के बावजूद पुलिसकर्मी लगातार और रकम की मांग करते रहे।
अनूप राणा का कहना है कि 24 दिसंबर 2023 को उसे ठाटीपुर थाने बुलाया गया, जहां उसे और उसके परिवार को डराया-धमकाया गया। यहां तक कि एनकाउंटर में मारने की धमकी भी दी गई। आरोप है कि साइबर आरक्षक संतोष वर्मा उसके घर से 9 लाख 75 हजार रुपए और चंद्रलेखा जैन से 15 लाख रुपए लेकर थाने पहुंचा था। परिवादी के मुताबिक, अतिरिक्त रकम नहीं देने पर उसे एक ऐसे मामले में साजिशकर्ता बनाकर जेल भेज दिया गया, जिसमें उसका नाम तक नहीं था। बाद में 8 फरवरी 2024 को हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आया।
मामले में तत्कालीन एसपी और थाना प्रभारी की मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं। परिवादी का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट में दायर परिवाद में धारा 120-बी के तहत आपराधिक षड्यंत्र का आरोप भी जोड़ा गया है।
इस केस में एक और बड़ा खुलासा सीसीटीवी फुटेज को लेकर हुआ है। आरोप है कि ठाटीपुर थाने की हार्ड डिस्क से 3 जनवरी 2024 से पहले की रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी गई। कोर्ट के निर्देश पर जब फुटेज मांगे गए तो वे उपलब्ध नहीं कराए जा सके। एडिशनल एसपी रेडियो की जांच में भी रिकॉर्ड डिलीट होने की बात सामने आई।