कैमरे बंद होते ही झूठे साबित हुए दावे; ग्वालियर बिड़ला नर्सिंग कॉलेज में फीस के लिए फिर सड़कों पर छात्राएं

Gwalior Birla Nursing College protest: बिड़ला नर्सिंग कॉलेज में फीस वापसी के नाम पर छात्राओं से छलावा, NSUI और यूथ कांग्रेस नेताओं के दावों के 2 दिन बाद भी नहीं मिली फीस।
Birla Nursing College students protest over fee issue in Gwalior
ग्वालियर में नर्सिंग छात्रों का प्रदर्शन(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Student Protest On Fees Dispute Gwalior: मध्य प्रदेश में नर्सिंग फर्जीवाड़े और परीक्षाओं में हो रही देरी को लेकर पूरे प्रदेश में राजनीति गरमाई हुई है। ग्वालियर के नर्सिंग कॉलेजों में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं, जहां छात्र-छात्राएं अपनी मांगों और फीस वापसी के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। लेकिन इस बीच, छात्रों के आंदोलन पर श्रेय लेने की राजनीति भी हावी होती दिख रही है। ताज़ा मामला ग्वालियर के प्रतिष्ठित बिड़ला नर्सिंग कॉलेज का है, जहां सोशल मीडिया पर 'समाधान' के दावे तो किए गए, लेकिन धरातल पर छात्राएं आज भी इंसाफ के लिए गुहार लगा रही हैं।

​ग्वालियर का बिड़ला नर्सिंग कॉलेज जहां पिछले कई दिनों से नर्सिंग की छात्राएं अपनी लंबित मांगों और फीस वापसी को लेकर धरना प्रदर्शन कर रही हैं। कुछ दिनों पहले एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष पवन शर्मा के नेतृत्व में छात्राओं ने जोरदार प्रदर्शन किया था। इसके ठीक एक हफ्ते बाद यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मितेंद्र दर्शन सिंह और एनएसयूआई पदाधिकारी एक बार फिर प्रदर्शन में शामिल हुए।

प्रदर्शन के दौरान कॉलेज प्रबंधन ने फीस लौटाने की मौखिक सहमति जताई

​प्रदर्शन के दौरान कॉलेज प्रबंधन और डायरेक्टर ने छात्राओं की फीस लौटाने की बात पर मौखिक सहमति जताई। इसके तुरंत बाद ही सोशल मीडिया पर एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस नेताओं के समर्थन वाले वीडियो की बाढ़ आ गई। छात्राओं से बाकायदा वीडियो बनवाकर पोस्ट करवाए गए, जिनमें यह दावा किया गया कि एनएसयूआई के प्रयासों से छात्राओं की समस्याओं का समाधान हो गया है।

दो दिन बाद भी नहीं मिली फीस वापस

सोशल मीडिया के इन 'धन्यवाद' वाले वीडियो की सच्चाई महज दो दिन में ही सामने आ गई। दो दिन बाद भी जब फीस वापस नहीं मिली और मांगें जस की तस रहीं, तो छात्राएं एक बार फिर कॉलेज के मुख्य गेट पर प्रदर्शन करने को मजबूर हो गईं। जब छात्राएं अपनी फरियाद लेकर प्रिंसिपल मैडम के पास पहुंचीं, तो मैडम मुख्य द्वार से जाने के बजाय पीछे के गेट से चुपचाप निकल गईं।

छात्र नेता केवल श्रेय लेने की होड़ में लगे!​​

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ हो चुकी है कि छात्र संगठनों के नेता केवल सोशल मीडिया पर श्रेय लेने की होड़ में लगे हैं। जब कैमरे ऑन होते हैं तो आश्वासन मिलते हैं, लेकिन कैमरे बंद होते ही छात्राएं फिर से सड़कों पर अकेली नजर आती हैं। देखना होगा कि आखिर कब तक नर्सिंग छात्राओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ चलता रहता है और कब इन्हें वास्तव में न्याय मिलता है।

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