

Dindori Collector Anju Pawan Bhadoria : डिंडौरी जिले में निर्माणाधीन आंगनवाड़ी भवनों के काम में लापरवाही और अनावश्यक देरी को लेकर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने सख्त रुख अपनाया है। निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान चार उपयंत्रियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को तय समय-सीमा में कार्यवाही पूरी कर निर्माण कार्यों में प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर की अध्यक्षता में 31 अगस्त 2026 को जिले में निर्माणाधीन आंगनवाड़ी भवनों के कार्यों की समीक्षा बैठक हुई। इसमें डिंडौरी और शहपुरा के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिले के उपयंत्री और सहायक यंत्री सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी मौजूद रहे।
समीक्षा के दौरान जनपद पंचायत करंजिया में छह आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण में देरी का मामला सामने आया। संदीप शुक्ला और जॉन अनुग्रह देवड़ा, दोनों उपयंत्री (संविदा), VB-GRAMG के जिम्मे तीन-तीन भवनों का निर्माण कार्य था। निर्धारित समय-सीमा बीतने के बाद भी ये भवन पूरे नहीं हुए। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए दोनों उपयंत्रियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
जनपद पंचायत डिंडौरी में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत स्वीकृत आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण को लेकर भी लापरवाही सामने आई। अमित नानोटे और सुनील धुर्वे, दोनों उपयंत्री (संविदा), VB-GRAMG के जिम्मे दो-दो भवन थे, लेकिन इन भवनों का निर्माण कार्य अब तक शुरू ही नहीं किया गया था। कलेक्टर ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए दोनों उपयंत्रियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
कलेक्टर ने चारों संबंधित उपयंत्रियों को 15 दिन की समय-सीमा में निर्धारित कार्रवाई पूरी करने और निर्माण कार्यों में प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को काम की लगातार निगरानी करने और तय समय पर निर्माण पूरा कराने के लिए कहा गया है।
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराया जाए। चार उपयंत्रियों को नोटिस जारी होने के बाद प्रशासन ने यह संकेत दिया है कि सरकारी निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।