

Shivraj Singh Chouhan Statement: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-4 के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर दिया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लाड़ली बहना जैसी योजनाएं महिलाओं की आर्थिक ताकत बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
संबोधन के दौरान जब केंद्रीय मंत्री ने उपस्थित जनसमूह से पूछा कि 1500 रुपये की वर्तमान राशि को कितना बढ़ाया जाना चाहिए, तो महिलाओं की ओर से 3000 रुपये की मांग उठी। इस पर उन्होंने आश्वस्त किया कि यह सहायता राशि धीरे-धीरे बढ़ाकर 3000 रुपये तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश की इस पहल के बाद अब देश के विभिन्न राज्यों को भी महिलाओं के लिए इस तरह की वित्तीय सहायता योजनाएं (जैसे लाड़की बहना और मैया सम्मान योजना) बनानी पड़ रही हैं।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने महिलाओं को छोटी-छोटी जरूरतों (जैसे एक-दो हजार रुपये) के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहते देखा है। गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की बहनों को होने वाली इसी परेशानी को दूर करने के लिए उन्होंने लाड़ली बहना योजना की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि इस योजना से महिलाओं की सामाजिक और पारिवारिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव आया है, जिससे घर में उनका सम्मान बढ़ा है और परिवार के सदस्य भी उनकी राय को महत्व देने लगे हैं।
महिलाओं की राजनीतिक जागरूकता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पहले यह माना जाता था कि परिवार का मुखिया जिस दल को समर्थन देगा, घर की महिलाएं भी उसी दिशा में मतदान करेंगी। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। महिलाएं अपनी निर्णय क्षमता को खुद पहचानती हैं और यह तय करती हैं कि उन्हें किसे वोट देना है। उन्होंने एक घटना का उदाहरण भी साझा किया, जिसमें लाड़ली बहना योजना का लाभ लेने वाली एक महिला पर वोट देने का दबाव बनाने और विरोध करने पर मारपीट करने के मामले में उन्होंने खुद प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि बहनों को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि उन्हें पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। गरीबी को सबसे बड़ा दुख बताते हुए उन्होंने 'लखपति दीदी अभियान' को तेजी से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़कर उनकी वार्षिक आय कम से कम 1 लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण, बैंकों से वित्तीय सहयोग और कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वे अपना खुद का कारोबार शुरू कर सकें।