MP में 'वीआईपी रुतबा' दिखाने का क्रेज, ढाई साल में कटे 1 हजार से ज्यादा चालान; अब भी 'पेंडिंग' है वसूली की रकम

Action On Vehicles VIP Culture: एमपी में अवैध हूटर लगाकर वीआईपी रुतबा दिखाने वालों पर कड़ा एक्शन, ढाई साल में 1000 से ज्यादा चालान, इंदौर और भोपाल में सबसे ज्यादा कार्रवाई।
The ongoing crackdown highlights the administration's efforts to curb the misuse of VIP symbols and ensure compliance with the Motor Vehicles Act across the state
एमपी में वीआई रुतबा दिखाने का क्रेज (सोर्स- एआई जनरेटेड इमेज)
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Traffic Police Challan In Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में गाड़ियों पर अवैध रूप से हूटर लगाकर वीआईपी रुतबा दिखाने का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है। सड़क पर अलग पहचान बनाने और प्रभाव जमाने की चाहत में लोग मोटर व्हीकल नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।

यही वजह है कि राज्यभर में पुलिस और ट्रैफिक विभाग को लगातार कार्रवाई करनी पड़ रही है। आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच प्रदेश में अवैध हूटर लगाने के मामलों में 1,000 से अधिक चालान काटे जा चुके हैं।

इंदौर और भोपाल में सबसे ज्यादा कार्रवाई

प्रदेश के बड़े शहरों में अवैध हूटर लगाने का सबसे अधिक क्रेज देखने को मिला है। इस मामले में इंदौर जिला सबसे आगे रहा, जहां पुलिस ने 255 से अधिक वाहन चालकों पर कार्रवाई की। वहीं राजधानी भोपाल में भी वीआईपी कल्चर की चाहत कम नहीं दिखी और यहां 141 चालान काटे गए। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति हूटर का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है और ऐसे मामलों में लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है।

चंबल अंचल में भी दिखा वीआईपी संस्कृति का असर

सिर्फ बड़े शहर ही नहीं, बल्कि चंबल अंचल में भी अवैध हूटर लगाने के कई मामले सामने आए। मुरैना में 100 से अधिक, जबकि भिंड में 92 वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई। इसके अलावा दतिया में 52, उज्जैन में 68 और श्योपुर में 10 चालान दर्ज किए गए। दूसरी ओर टीकमगढ़ ऐसा जिला रहा, जहां ढाई साल के दौरान अवैध हूटर लगाने का एक भी मामला सामने नहीं आया और पुलिस को कोई चालान नहीं काटना पड़ा।

चालान कटे, लेकिन जुर्माने की रकम अब भी लंबित

कार्रवाई के बीच एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ट्रैफिक पुलिस द्वारा काटे गए कई चालानों की जुर्माना राशि अब तक सरकारी खजाने में जमा नहीं हो सकी है। विभिन्न जिलों में 1 लाख रुपये से अधिक की राशि अभी भी लंबित बताई जा रही है।

इससे चालान वसूली और राशि जमा करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सिर्फ नियमों का पालन कराना ही नहीं, बल्कि वसूली गई राशि का समय पर सरकारी खाते में जमा होना भी बड़ी चुनौती बन गया है।

https://youtu.be/ZpzQBJgK5EE?si=xoCIEIrma2Ts2H-D

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