MP पाठ्य पुस्तक निगम अध्यक्ष सौभाग्य सिंह के अधिकार होंगे बहाल! वाहन रैली विवाद को लेकर CMO को सौंपा जवाब

Vehicle Rally Controversy Update MP: मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह को राहत देने की तैयारी, वाहन रैली विवाद के बाद 14 मई से छीने गए अधिकार फिर से होंगे बहाल।
Saubhagya Singh submits response to CMO
सौभाग्य सिंह वाहन रैली विवाद को लेकर जल्द आ सकता है फैसला(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Saubhagya Singh Rights Restored Soon: मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह के अधिकार फिर से बहाल करने की तैयारी में है। महीनों पहले उज्जैन-भोपाल के बीच निकाली गई एक विशाल वाहन रैली के विवाद के बाद उनके अधिकारों पर रोक लगा दी गई थी।

सिंह को निगम परिसर में प्रवेश करने, सरकारी सुविधाओं का उपयोग करने और निर्णय लेने से रोक दिया गया था। अब उनका जवाब मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) पहुंच गया है, जिसके बाद यह फैसला लिया जा रहा है।

क्यों छिने गए थे अधिकार?

सौभाग्य सिंह के अधिकारों पर 14 मई से प्रतिबंध लगा हुआ था। दरअसल, जब उनकी नियुक्ति हुई थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील की थी। प्रधानमंत्री की अपील के बाद, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सभी बोर्ड और निगमों के अध्यक्षों को सादगीपूर्ण तरीके से शपथ ग्रहण करने की सलाह दी थी। लेकिन, पार्टी के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए सौभाग्य सिंह ने उज्जैन से भोपाल तक एक विशाल वाहन रैली का आयोजन किया, जिसकी काफी आलोचना हुई।

लगाई गई थीं ये सख्त पाबंदियां

इस कृत्य के बाद, मुख्यमंत्री कार्यालय के ओएसडी अजातशत्रु श्रीवास्तव के हस्ताक्षर से सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस के तहत उन पर कई प्रतिबंध लगाए गए। निगम परिसर में उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई, सरकारी वाहनों, कर्मचारियों और अन्य सुविधाओं के उपयोग पर पाबंदी लगा दी गई। उन्हें किसी भी बैठक में भाग लेने, वित्तीय निर्णय लेने और निगम प्रमुख के रूप में किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से रोक दिया गया।

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सीएम मोहन यादव का निर्णय

सौभाग्य सिंह द्वारा कारण बताओ नोटिस का जवाब सीएमओ को भेज दिया गया है। जवाब मिलने के बाद, सरकार उनकी गलती को माफ करते हुए उनके अधिकार बहाल करने की योजना बना रही है। बीच में ऐसी भी चर्चाएं थीं कि अधिकारों के अभाव में निगम का प्रभार सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंपा जा सकता है। हालांकि, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने निगम का प्रभार किसी और को सौंपने के बजाय, अपने कार्यालय को सौभाग्य सिंह के अधिकारों को बहाल करने का सुझाव दिया है।

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