

MP बना टाइगर स्टेट के साथ चीता स्टेट भी।
कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर हुई 53।
भारत में कुल 60 चीते, 41 का जन्म यहीं हुआ।
गांधीसागर में चीतों की संख्या हुई चार।
चीता संरक्षण से MP की वन्यजीव पहचान हुई मजबूत।
Madhya Pradesh Wildlife Special Story: हम पहले से ही टाइगर स्टेट हैं, अब घड़ियाल, गिद्ध और चीते के साथ चीता स्टेट के रूप में भी अपनी पहचान बना रहे हैं....यह बयान है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का।
दरअसल, मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां 780 से ज्यादा बाघ मौजूद हैं यह आंकड़ा भारत में किसी भी राज्य से सबसे ज्यादा हैं। ऐसे में अब अगर बात करें एमपी के चीता स्टेट बनने की तो न केवल यह प्रदेश की बदलती वन्यजीव पहचान है बल्कि यह एक बड़ी उपलब्धी भी है। तो आइए मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर जानते हैं कि आखिर हम कैसे चीताओं के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्वास परियोजना (प्रोजेक्ट चीता) के तहत अफ्रीकी चीतों को बसाया गया। इसकी शुरुआत सितंबर के महीने में साल 2022 को हुई, जब पीएम नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से और चीते लाए गए।
प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य: दरअसल, भारत में 1952 में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था। इस परियोजना का मकसद घास के मैदानों और अर्ध-शुष्क पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को बहाल करना है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रोजेक्ट चीता का सकारात्मक असर देखने को मिला है। जिसके चलते एमपी के कूनो और भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 59 हो गई है। बता दें कि, इनमें से 41 चीते भारत में ही जन्मे हैं। हालांकि 19 चीते विदेशी हैं, जिनमें 2 नामीबिया, 9 साउथ अफ्रीका और 9 बोत्सवाना के हैं। जबकि 53 चीते कूनो नेशनल पार्क में है।
अप्रैल 2025 में कुनो से दो नर चीते पावक और प्रभास को गांधीसागर लाया गया था। जिसके बाद 20 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता राधा को खुले जंगल में छोड़ा। अब अभयारण्य में कुल चार चीते हैं।
मध्य प्रदेश में चीतों की बढ़ती संख्या और कूनो के साथ गांधीसागर में उनके पुनर्वास की पहल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कभी देश से विलुप्त हो चुके चीतों को फिर से भारतीय जंगलों में बसाने की यह कोशिश अब नए मुकाम पर पहुंच रही है। टाइगर स्टेट के रूप में पहचान बना चुका मध्य प्रदेश अब चीता संरक्षण के जरिए भी देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है।