

MP Congress Delhi Protest: राज्यसभा चुनाव से जुड़े घटनाक्रम के बीच कांग्रेस ने अपने विरोध को राष्ट्रीय स्तर पर तेज कर दिया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के सभी विधायक शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे और पार्टी के पुराने मुख्यालय 24, अकबर रोड पर एकत्र हुए। इस दौरान विधायकों ने नारेबाजी करते हुए लोकतंत्र की रक्षा और पार्टी के पक्ष में आवाज बुलंद की। कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय भी मांगा है और अनुमति मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि पार्टी लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष के अगले चरण में प्रवेश कर रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराने की योजना है। साथ ही कांग्रेस मीडिया के सामने भी अपना पक्ष विस्तार से रखेगी और उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जीतू पटवारी ने राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में यह पहली बार हुआ है जब राज्यसभा चुनाव के नामांकन को इस तरह निरस्त किया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश लोकतंत्र से हटकर तानाशाही या ऑटोक्रेसी की ओर बढ़ रहा है।
पटवारी ने दावा किया कि कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता थी और उनके अनुसार अन्य दलों के कुछ विधायक भी कांग्रेस के पक्ष में थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास आवश्यक संख्या नहीं होने के कारण शीर्ष नेतृत्व ने ऐसी स्थिति पैदा की, जिससे नामांकन निरस्त हो गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं आमतौर पर छोटे स्थानीय चुनावों में देखने को मिलती हैं, लेकिन उच्च सदन के चुनाव में ऐसा होना गंभीर चिंता का विषय है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, युवाओं के भविष्य से जुड़े पेपर लीक के मामले, किसानों को खाद और उर्वरक की उपलब्धता जैसी समस्याओं पर सरकार जवाबदेही से बच रही है। उनके मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था भी कई चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन जनता के मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
इस दौरान मध्य प्रदेश भवन से 24, अकबर रोड तक पहुंचे कांग्रेस विधायकों ने “लड़ेंगे, जीतेंगे” और “नारी शक्ति का अपमान नहीं सहेंगे” जैसे नारे लगाए। पार्टी का कहना है कि वह लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए अपना आंदोलन जारी रखेगी।