MP में समय से पहले स्थगित हुआ मानसून सत्र; 'कॉकरोच' टिप्पणी और इस्तीफे की चुनौती पर गरमाई राजनीति

MP Assembly Update: एमपी विधानसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, 'कॉकरोच' टिप्पणी और सत्र की अवधि को लेकर उमंग सिंघार और कैलाश विजयवर्गीय में छिड़ी तीखी जंग।
Madhya Pradesh Assembly's Monsoon Session was adjourned ahead of schedule amid political controversy over a 'cockroach' remark and a resignation challenge that intensified the debate between the ruling party and the Opposition
एमपी विधानसभा (सोर्स- सोशल मीडिया)
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MP Assembly Monsoon Session Adjourned: मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र निर्धारित समय से पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विधानसभा परिसर के बाहर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मंत्री विश्वास सारंग और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सदन में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा कथित तौर पर "कॉकरोच" शब्द का इस्तेमाल किया गया था, जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि बाद में यह साबित होता है कि वीडियो से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है और मंत्री ने वास्तव में यह शब्द कहा है, तो वह अपने बयान के अनुरूप इस्तीफा देने को तैयार हैं। सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि मानसून सत्र को दो दिन पहले समाप्त कर देने से कई विधायकों के प्रश्न और महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे अधूरे रह गए।

कांग्रेस ने सदन का समय हंगामे में बर्बाद किया- विश्वास सारंग

खेल एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विधानसभा में सभी विधायकों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सदन का समय हंगामे में बर्बाद किया और विकास व जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा नहीं होने दी। सारंग ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का समर्थन करते हुए कहा कि इससे हलाला जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगेगी और प्रदेश सामाजिक सुधार की दिशा में आगे बढ़ेगा।

कैलाश विजयवर्गीय ने बयान विवाद पर क्या कहा?

वंही दूसरी तरफ, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष स्वयं स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्होंने सदन में उस शब्द का प्रयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब अध्यक्ष ने स्थिति स्पष्ट कर दी है, तो इससे बड़ा कोई प्रमाण नहीं हो सकता। विजयवर्गीय ने कहा कि अब नेता प्रतिपक्ष को अपने बयान के अनुसार इस्तीफा देना चाहिए।

मानसून सत्र तय अवधि से पहले समाप्त होने और कथित टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विधानसभा से निकलकर राजनीतिक बयानबाजी का बड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।

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