डॉ. मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर क्रांति गौड़ को किया सम्मानित, लार्ड्स में 7 विकेट लेकर रचा इतिहास

Kranti Gaur News : मुख्यमंत्री ने खेल विभाग की ओर से 3 लाख और अपनी ओर से 2 लाख रुपए की सम्मान राशि का सौंपा चेक। छोटे से गांव से टीम इंडिया की ब्लू जर्सी पहनने तक का संघर्ष वाला सफर
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क्रान्ति गौड़ का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव Social Media
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Kranti Gaur Cricket Achievement: मध्यप्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री निवास स्थित संवाद भवन में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया,

जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश की सुप्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर क्रांति गौड़ और उनके परिजनों को सम्मानित किया।

ऐतिहासिक उपलब्धि और सम्मान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लंदन के ऐतिहासिक लार्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर शानदार प्रदर्शन करने वाली बुंदेलखंड की गौरव क्रांति गौड़ को सम्मानित किया। क्रांति गौड़ लार्ड्स के प्रतिष्ठित 'टेस्ट ऑनर्स बोर्ड' पर अपना नाम दर्ज कराने वाली भारत की पहली महिला क्रिकेटर बन गई हैं। उन्होंने लार्ड्स के मैदान पर 7 विकेट लेकर बेहतरीन गेंदबाजी का प्रदर्शन किया था।

सरकार ने दी 5 लाख रु की सम्मना राशि

इस बड़ी उपलब्धि पर मुख्यमंत्री नेखेल एवं युवा कल्याण विभाग, मप्र शासन की ओर से 3 लाख रुपए का चेक और स्मृति चिन्ह भेंट किया।मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से प्रोत्साहन स्वरूप 2 लाख रुपए की सम्मान राशि का एक और चेक सौंपा। क्रांति के पिता नरसिंह और भाई महेन्द्र सिंह को भी शॉल-श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।

 सरकार की खेल-अनुकूल नीतियां

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर, खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य में 'खेलो बढ़ो अभियान' के तहत सांसद कप और विधायक कप आयोजित करके तहसील व विधानसभा स्तर तक खेल प्रतिभाओं को निखारा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि आज प्रदेश के बेटे-बेटियां ओलिम्पिक, खेलो इंडिया और अन्य राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

संघर्ष से सफलता का सफर: क्रांति गौड़

कार्यक्रम के दौरान क्रिकेटर क्रांति गौड़ ने मप्र खेल अकादमी के युवा खिलाड़ियों से अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि बचपन के तमाम संघर्षों के बीच उन्होंने टीम इंडिया की नीली जर्सी (ब्लू जर्सी) पहनने का जो सपना देखा था, वह उनके माता-पिता और परिवार के अटूट सहयोग के बिना मुमकिन नहीं था। उन्होंने याद किया कि कैसे उनके परिवार ने बारिश में टपकते मकान और घर में राशन न होने जैसी आर्थिक तंगी के बावजूद उनका साथ दिया।

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