

Digvijaya Singh Defamation Case: भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में सुनवाई के दौरान उन्हें झटका लगा है। न्यायिक दंडाधिकारी एमपी एवं एमएलए कोर्ट ने परिवादी साक्षी के प्रतिपरीक्षण के लिए लगातार अवसर मिलने के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने पर दिग्विजय सिंह पर 1000 रुपये की शास्ति अधिरोपित की है।
अदालत ने उनके अधिवक्ता के आचरण को देखते हुए आगामी पेशी पर साक्षी के प्रतिपरीक्षण के लिए उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा की शिकायत पर दर्ज किया गया था। आरोप है कि दिग्विजय सिंह ने व्यापमं कांड को लेकर वीडी शर्मा के खिलाफ सार्वजनिक रूप से गंभीर और मानहानिकारक आरोप लगाए थे। शर्मा की शिकायत के आधार पर कोर्ट ने 5 दिसंबर 2022 को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत दिग्विजय सिंह के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। शिकायत में कहा गया था कि इन बयानों से उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई।
मामला साल 2014 में दिए गए दिग्विजय सिंह के एक बयान से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, 4 जुलाई 2014 को इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के सामने दिग्विजय सिंह ने वीडी शर्मा पर व्यापमं घोटाले में बिचौलिए की भूमिका निभाने का आरोप लगाया था। उन्होंने शर्मा के एबीवीपी से जुड़े रहने का उल्लेख करते हुए कथित तौर पर व्यापमं मामले में मध्यस्थ की भूमिका का आरोप लगाया था। वीडी शर्मा ने कोर्ट में कहा कि इन आरोपों को बड़ी संख्या में लोगों ने पढ़ा और सुना, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
सुनवाई के दौरान परिवादी साक्षी के प्रतिपरीक्षण के लिए अभियुक्त पक्ष को लगातार अवसर दिए जाने के बावजूद प्रतिपरीक्षण नहीं किया गया। अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए दिग्विजय सिंह पर 1000 रुपये की शास्ति लगाई और अगली पेशी पर साक्षी के प्रतिपरीक्षण के लिए उन्हें पाबंद किया है। इस मामले में अब आगामी सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत की कार्रवाई के बाद बीजेपी की ओर से इसे दिग्विजय सिंह के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।