भोपाल में बिना जरूरत वन भवन परिसर में बदले जा रहे पेविंग ब्लॉक; कांग्रेस ने लगाए लाखों के भ्रष्टाचार के आरोप

Bhopal Van Bhawan Corruption Allegations: भोपाल वन भवन में पेविंग ब्लॉक बदलने पर छिड़ा सियासी संग्राम, अच्छे ब्लॉक्स हटाने पर कांग्रेस ने लगाए वित्तीय हेरफेर के आरोप, भाजपा ने दावों को नकारा।
Congress alleges corruption in paving block replacement at Bhopal Van Bhavan
भोपाल वन भवन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Updated on

MP Congress Allegations On Van Bhawan Bhopal: राजधानी भोपाल स्थित वन विभाग के मुख्यालय वन भवन परिसर में इन दिनों पेविंग ब्लॉक बदलने का कार्य चर्चा का विषय बना हुआ है। परिसर में लगे पुराने पेविंग ब्लॉक हटाकर नए ब्लॉक लगाए जा रहे हैं, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।

आरोप है कि पुराने ब्लॉक अभी भी अच्छी स्थिति में हैं और उनका उपयोग किया जा सकता था, इसके बावजूद उन्हें हटाकर नया निर्माण कराया जा रहा है। इस मामले ने सरकारी खर्च और निर्माण कार्यों की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

बड़े बजट के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष का हमला

जानकारी के अनुसार, वन भवन के निर्माण के समय लगाए गए अधिकांश पेविंग ब्लॉक अब भी उपयोग योग्य बताए जा रहे हैं और उनमें व्यापक क्षति दिखाई नहीं देती। इसके बावजूद पूरे परिसर में ब्लॉक बदलने का कार्य कराया जा रहा है। आरोप है कि इस परियोजना के लिए वन विभाग द्वारा बड़ा बजट स्वीकृत किया गया है। इसी को आधार बनाते हुए विपक्ष ने सरकारी धन के उपयोग पर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की है।

कांग्रेस ने जांच की मांग, भाजपा ने आरोपों को बताया निराधार

इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने सरकार और वन विभाग को घेरते हुए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि जब पुराने पेविंग ब्लॉक अच्छी स्थिति में हैं तो उन्हें बदलने की आवश्यकता समझ से परे है। उनका आरोप है कि बिना जरूरत सरकारी धन खर्च किया जा रहा है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विभागीय निर्माण और रखरखाव से जुड़े सभी कार्य निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति के बाद ही किए जाते हैं।

रखरखाव या फिजूल खर्च? आधिकारिक जवाब का इंतजार

वन भवन में चल रहे इस कार्य को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि निर्माण कार्य वास्तव में आवश्यक नहीं था तो सरकारी धन का दुरुपयोग माना जाना चाहिए। दूसरी ओर भाजपा का तर्क है कि किसी भी निर्माण या मरम्मत कार्य के पीछे तकनीकी आवश्यकता और विभागीय मानक होते हैं।

फिलहाल वन विभाग की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक बहस के साथ-साथ प्रशासनिक पारदर्शिता का भी मुद्दा बनता जा रहा है।

https://youtu.be/GrHGDtfqIRY?si=bb7yUEbyICY0ZhL4

Navbharat Live
navbharatlive.com