भोपाल: हमीदिया अस्पताल में नवाबों के दौर का नागदेवता मंदिर, नागपंचमी पर उमड़ता है आस्था का सैलाब

Hamidia Hospital Nagdevta Temple: हमीदिया अस्पताल परिसर में आस्था का अनोखा केंद्र, जमीन से प्रकट हुई थी पंचमुखी नागदेवता की प्रतिमा, नवाबों के दौर से जुड़ती हैं कहानियां, दिखता है नागों का जोड़ा।
Nag Panchami celebrations at Hamidia Hospital temple
भोपाल में नवाबों के दौर का नागदेवता मंदिर(सोर्स- नवभारत लाइव)
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Nag Panchami Special Story Bhopal: राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल परिसर में एक ऐसा धार्मिक स्थल भी है, जो अस्पताल की चहल-पहल के बीच वर्षों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां स्थित नागदेवता मंदिर में नागपंचमी और महाशिवरात्रि के मौके पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। भोपाल ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यता बेहद दिलचस्प है। स्थानीय सेवादारों और श्रद्धालुओं के मुताबिक, पंचमुखी नागदेवता की प्रतिमा जमीन से अपने आप प्रकट हुई थी। इसी मान्यता के चलते इस स्थान को लेकर लोगों की आस्था लगातार बनी हुई है। हालांकि प्रतिमा के जमीन से निकलने की इस कहानी का कोई आधिकारिक या पुरातात्विक प्रमाण फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

मंदिर में दिखाई देता है नागों का जोड़ा

राजधानी भोपाल के लोगों की मानें तो मंदिर परिसर में अक्सर पंचमुखी नागदेवता का जोड़ा दिखाई देता है। उनका कहना है कि ये नाग यहां घूमते हैं, लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते। श्रद्धालु इसे नागदेवता की मौजूदगी और मंदिर की धार्मिक मान्यता से जोड़कर देखते हैं।

40 साल पुराना या सैकड़ों साल?

मंदिर की वास्तविक उम्र को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आते हैं। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर करीब 40 साल पुराना है, जबकि कुछ इसे सैकड़ों साल पुराना बताते हैं और इसकी शुरुआत नवाबों के दौर से जोड़ते हैं। हालांकि मंदिर की स्थापना और प्राचीनता को प्रमाणित करने वाला कोई पुख्ता ऐतिहासिक दस्तावेज फिलहाल सामने नहीं आया है। यही वजह है कि मंदिर का इतिहास आज भी आस्था, स्थानीय मान्यताओं और सुनी-सुनाई कहानियों के बीच मौजूद है।

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अस्पताल परिसर में आस्था का अनोखा केंद्र

हमीदिया अस्पताल में इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आने वाले लोगों के बीच भी यह मंदिर अपनी अलग पहचान रखता है। नागपंचमी और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भोपाल के इस मंदिर की खासियत यही है कि इसके इतिहास को लेकर भले ही पुख्ता प्रमाण उपलब्ध न हों, लेकिन स्थानीय लोगों की आस्था ने इसे लंबे समय से एक अलग पहचान दे रखी है। नवाबों के दौर से जुड़ी कहानियां, जमीन से प्रतिमा निकलने की मान्यता और नागों के जोड़े के दिखाई देने की चर्चाएं इस मंदिर को शहर के दूसरे धार्मिक स्थलों से अलग बनाती हैं।

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