डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा भोपाल AIIMS, एक-एक डॉक्टर के भरोसे चल रहे 9 विभाग, कार्डियोलॉजी का हाल बेहाल

Bhopal AIIMS Doctor Shortage: भोपाल एम्स डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। 30 में से 9 विभाग एक-एक डॉक्टर के भरोसे चल रहे हैं। कॉर्डियोलॉजी विभाग का हाल सबसे ज्यादा बुरा है। रोज मरीज परेशान हो रहे हैं।
AIIMS Bhopal Doctor Shortage
भोपाल एम्स (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Bhopal AIIMS News: मध्य प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थानों में शामिल भोपाल एम्स इन दिनों खुद बीमार नजर आ रहा है। सुपर स्पेशियलिटी और टर्शियरी केयर के दावों के बीच संस्थान डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। आलम यह है कि एम्स के 30 में से 9 महत्वपूर्ण विभाग केवल एक-एक डॉक्टर के सहारे चल रहे हैं, जिससे न केवल इलाज की गुणवत्ता गिर रही है, बल्कि मरीजों की जान पर भी बन आई है।

पिछले कुछ समय में एम्स की ओपीडी का आंकड़ा 5 हजार से बढ़कर 7 हजार मरीज प्रतिदिन तक पहुंच गया है। ऐसे में डॉक्टर को रोजाना 100 से 200 मरीज देखने पड़ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, एक मरीज को औसतन 2 से 3 मिनट का समय ही मिल पा रहा है, जो सुपर स्पेशियलिटी केयर के मानकों के विपरीत है। मरीजों की शिकायत है कि डॉक्टर न तो उनकी पूरी बात सुन पा रहे हैं और न ही बीमारी को विस्तार से समझ पा रहे हैं।

कार्डियोलॉजी विभाग का हाल बेहाल

सबसे गंभीर स्थिति कार्डियोलॉजी विभाग की है। दिल की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पूरे प्रदेश से मरीज यहां आते हैं, लेकिन यहां फिलहाल केवल एक ही डॉक्टर तैनात है। पूर्व में दो कंसल्टेंट थे, लेकिन कार्यकाल खत्म होने के बाद वे भी चले गए। अब अकेले डॉक्टर पर ओपीडी, आईपीडी (भर्ती मरीज) और रिसर्च कार्य की ट्रिपल जिम्मेदारी है।

कैपिंग खत्म होने से बढ़ी मुश्किलें

करीब 3 साल पहले तक भोपाल एम्स में एक विभाग में प्रतिदिन केवल 80 मरीजों की कैपिंग थी। पूर्व डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने मरीजों की भीड़ को देखते हुए यह सीमा खत्म कर दी थी। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, दोपहर 1 बजे तक जितने पर्चे बनते हैं, डॉक्टर को उन सभी मरीजों को देखना अनिवार्य है। इससे डॉक्टरों पर काम का मानसिक और शारीरिक दबाव चरम पर है।

क्यों खाली पड़े हैं पद?

कई सुपर स्पेशियलिटी विभागों में पद आरक्षित श्रेणी के लिए हैं, लेकिन योग्य उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे हैं। अनारक्षित श्रेणियों के पद भरे जा चुके हैं। प्रबंधन ने केंद्र सरकार को सीटें 'कन्वर्ट' करने का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अभी तक हरी झंडी नहीं मिली है। साथ ही कॉन्ट्रैक्ट पर डॉक्टरों को रखने की कोशिशें भी विफल हो रही हैं। सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों के लिए महज डेढ़ लाख रुपए का वेतन और केवल 3 साल का अनुबंध किसी को आकर्षित नहीं कर रहा है। निजी अस्पतालों की तुलना में यह पैकेज बहुत कम है।

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