Ujjain: 'दिल तो महाकाल का...', भस्म आरती से पहले भक्त की मौत, आखिरी शब्द सुन रो पड़ लोग

Ujjain News: दिवाली के मौके पर महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती से पहले एक भक्त की मौत हो गई। मृतक ने कुछ घंटे पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा था, जिस जानकर हर कोई रो पड़ा।
Ujjain: 'दिल तो महाकाल का...', भस्म आरती से पहले भक्त की मौत, आखिरी शब्द सुन रो पड़ लोग
महाकालेश्वर मंदिर में भक्त की मौत (सौ. सोशल मीडिया)
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Devotee Dies In Mahakal Temple: महाकाल की नगरी उज्जैन से एक दुखद खबर सामने आई, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया। सोमवार की सुबह जब महाकालेश्वर मंदिर में हर दिन की तरह भस्म आरती की तैयारियां चल रही थीं, उसी दौरान एक भक्त ने अंतिम सांसें ली। लेकिन जो बात लोगों की आंखें नम कर गई, वो थी उस भक्त की आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें उन्होंने लिखा था, 'मिट्टी का शरीर है, सांसें सारी उधार हैं, दिल तो महाकाल का है, हम तो किरायेदार हैं...', यह स्टेटस भक्त ने मौत से कुछ ही घंटे पहले लगाया था, और सुबह मंदिर परिसर में उन्हें दिल का दौड़ पड़ गया।

मृतक की पहचान 47 वर्षीय सौरभ राज सोनी के रूप में हुई है। वे उज्जैन के पार्श्वनाथ सिटी में रहते थे और चाय की दुकान चलाते थे। सौरभ नियमित रूप से हर सोमवार महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में भाग लेते थे। महाकाल से उनका गहरा लगाव था और वे श्रद्धा के साथ हर सप्ताह सुबह तड़के दर्शन के लिए पहुंचते थे।

दिल का दौड़ा पड़ने से हुई मौत

सौरभराज हर सोमवार की तरह, इस सोमवार दीपावली के अवसर पर भी बाबा महाकाल की भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए रात करीब 1:00 बजे मंदिर पहुंचे थे। जैसे ही आरती शुरू होने वाली थी, वे गेट नंबर-1 के पास पहुंचे तभी उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वे बेहोश होकर गिर पड़े।आस पास मौजूद श्रद्धालुओं और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्राथमिक जांच में सौरभ की मौत दिल का दौड़ पड़े से मानी जा रही है।

सौरभ का आखिरी स्टेटस

सौरभराज सोनी के परिजन और मित्रों का कहना है कि उन्हें पहले ही अपनी मौत का आभास हो गया था।  उन्होंने अपने मरने से पहले अपने वॉट्सएप स्टेटस पर लिखा था- 'मिट्टी का शरीर है, सांसें उधार की है, दिल तो महाकाल का है, हम तो किराएदार हैं।'

श्रद्धालुओं में शोक की लहर

घटना की खबर फैलते ही मंदिर परिसर में शोक की लहर दौड़ गई। कई श्रद्धालु जिन्होंने सौरभ को नियमित रूप से आते देखा था, वे उनकी अंतिम उपस्थिति को याद कर भावुक हो उठे। कुछ लोगों ने कहा, 'ऐसा लगता है मानो महाकाल ने अपने इस भक्त को खुद अपने पास बुला लिया।'

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