नवरात्रि पर उत्तर प्रदेश के इन प्राचीन मंदिरों के करें दर्शन, हर इच्छा होगी पूरी

Famous Temples in UP: नवरात्रि का पर्व कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है ऐसे में उत्तर प्रदेश के कुछ प्राचीन मंदिरों के दर्शन किए जा सकते हैं। जहां नवरात्रि पर विशेष भीड़ होती है।
नवरात्रि पर उत्तर प्रदेश के इन प्राचीन मंदिरों के करें दर्शन, हर इच्छा होगी पूरी
यूपी के प्राचीन मंदिर (सौ. सोशल मीडिया)
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UP Oldest Temples: उत्तर प्रदेश में कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक इमारते हैं जिन पर कई लोगों की आस्था है। इसी तरह यूपी में कई चमत्कारी शक्तियों वाले देवी मंदिर हैं जो काफी प्रसिद्ध हैं। यहां दूर दराज से भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर में माता रानी स्वयं विराजमान हैं। जिस वजह से सच्चे मन से मनोकामना मांगने से हर इच्छा पूरी होती है।

उत्तर प्रदेश के इन प्राचीन मंदिरों से जुड़ी कई कहानियां, मान्यताएं और चमत्कार प्रचलित हैं। आज हम आपको यूपी के कुछ ऐसी ही प्राचीन और अद्भुत मंदिरों के बारे में बताएंगे, जहां आप नवरात्रि के शुभ अवसर पर जा सकते हैं।

देवीपाटन मंदिर

उत्तर प्रदेश का यह मंदिर बलरामपुर जिले में स्थित है जो सिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। माना जाता है कि इस मंदिर में माता सती का वाम स्कंध के साथ पट गिरा था। यही कारण है कि इस जगह का नाम पाटन रखा गया है। यहां माता मातेश्वरी स्वरूप में पूजी जाती हैं। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में एक अखंड धूनी जलती है जो त्रेता युग से लगातार जल रही है। ऐसे में नवरात्रि के मौके पर दूर दूर से भक्त देवीपाटन मंदिर के दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर की प्राचीनता और दिव्यता श्रद्धालुओं के बीच काफी मानी जाती है।

मां तरकुलहा मंदिर

उत्तर प्रदेश का यह मंदिर गोरखपुर जिले में स्थित जो स्थानीयों लोगों में काफी लोकप्रिय है। यहां पर मंदिर में मां दुर्गा के भक्तों की गहरी आस्था जुड़ी है। मां तरकुलहा देवी को शक्ति का अवतार माना जाता है। माना जाता है कि यह मंदिर प्राचीन काल से स्थित है जहां लोगों की मन्नत पूरी होती है।

माना जाता है कि यहां पर माता की प्रतिमा धरती से स्वयं प्रकट हुई थी। यहां श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं जो पूरी भी होती है। नवरात्रि के दौरान यहां पर भारी भीड़ लगती है।

विंध्यवासिनी देवी मंदिर

मिर्जापुर में स्थित विंध्यवासिनी देवी मंदिर वाराणसी के करीब 70 किमी दूर है। माना जाता है कि यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है। कहते हैं कि राक्षस महिषासुर का वध करने के बाद देवी ने विंध्याचल पर्वत पर निवास किया था।

इस मंदिर में साल भर भीड़ रहती है लेकिन नवरात्रि के समय यहां का माहौल बहुत खास हो जाता है। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि इसका अस्तित्व सृष्टि के बार भी रहेगा। यही वजह से लोग यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं।

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