जंतर-मंतर में पैलेट गन, रांची में पेंटबॉल गन, पुलिस ने उठाया नया हथियार! जानें कौन-सी है ज्यादा खतरनाक

Jharkhand Student Protest: रांची में छात्रों के विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस ने पेंटबॉल गन का इस्तेमाल किया। सोशल मीडिया पर इसे पैलेट गन बताया गया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।
Jharkhand Police Use Paintball Gun on Student Protest
पेंटबॉल गन के साथ झारखंड पुलिस का जवान (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Jharkhand Police Use Paintball Gun Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में हजारों छात्र पिछले दिनों से JPSC और  JSSC CGL में कथित धांधली को लेकर आंदोलन कर रहे थे। छात्रों का यह आंदोलन अपने निर्णक मोड़ पर आ गया। सरकार के तीन दौर की वार्ता असफल रहने के बाद छात्रों ने सोमवार विधानसभा तक मार्च करने का ऐलान किया। हालांकि पुलिस ने छात्रों को बीच रास्ते में ही रोक दिया। 

जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग भी किया। इस दौरान पुलिस ने छात्रों पर पेंटबॉल गन के साथ खड़ी नजर आई। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि झारखंड पुलिस ने जंतर-मंतर की तरह छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया है। विवाद बढ़ता देख रांची के एसपी ने इस पर सफाई दी और बताया कि सोशल मीडिया पर जिस गन को पैलेट गन बताया जा रहा है वो असल में पेंटबॉल गन हैं। 

क्या होता है 'पेंटबॉल गन'?

पेंटबॉल गन का इस्तेमाल सामान्य तौर पर पुलिस नहीं करती है। यह एक असली गन जैसी दिखने वाली नकली बंदूक है, जिसका इस्तेमाल बैटल ग्राउंड गेम खेलने के लिए किया जाता है। इसमें पहले एक बैटल ग्राउंड तैयार किया जाता है। जहां लोग दो या तीन टीम में बंटकर एक दूसरे पर गन फायर करते हैं। हालांकि इस गन से निकली गोली से चोट नहीं लगती है, क्योंकि उसमें रंग या पेंट भरा होता है। पेंटबॉल गन की गोली में रंग या पेंट इसलिए भरा जाता है कि इसे देखकर पहचाना जा सके कि गोली सही निशाने पर लगी है या नहीं।

इस गन को बैटल ग्राउंड गेम खेलने वाले लोगों को असली अनुभव देने के लिए बनाया गया था। पेंटबॉल गन में सामान्य तौर पर जिलेटिन से बने पानी में रंगीन गोलियों को फायर करती है। इसमें कंप्रेस्ड एयर की मदद से गोलियां फायर की जाती हैं। ये गोली काफी नरम होती है, ऐसे में लगने पर घाव या फिर कोई व्यक्ति घायल नहीं होता है. 

झारखंड पुलिस क्यों कर रही है इस्तेमाल?  

रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि रांची में छात्रों के प्रदर्शन में पुलिस पेंटबॉल गन का उपयोग कर रही है। पुलिस इसका इस्तेमाल इसलिए कर रही है ताकि इससे उपद्रवियों की पहचान की जा सके।  सिटी एसपी ने बताया कि प्रदर्शन में हिंसा या फिर बवाल करने वालों पर इस गन से फायर किया जा सकता है। इसके उनके कपड़ों में पेंट लग जाएगा और आसानी से उनकी पहचान की जा सकेगी। हालांकि इसमें पेपर बॉल और मिर्च भरकर भी चलाया जा सकता है।

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पैलेट गन से कितनी अलग पेंटबॉल गन?

पेंटबॉल गन और पैलेट गन में खतरे के हिसाब से काफी बड़ा अंतर है। पैलेट गन में सीसे से बने छर्रे डाले जाते हैं। जो इंसान के शरीर को छेदकर उसे गंभीर रुप से घायल कर सकता है। इसके अलावा पैलेट गन के इस्तेमाल से व्यक्ति की आंखो की रौशनी भी जा सकती है। जबकि पेंटबॉल गन से सिर्फ हल्का झटका लग सकता है। इसके अलावा जिलेटिन की गोलियां सीधे शरीर पर लगने से थोड़ा दर्द हो सकता है। इससे गंभीर चोट लगने का खतरा नहीं है।

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