झारखंड हाईकोर्ट ने सोरेन सरकार को दी टेंशन, माइनर्स से दुष्कर्म व प्रताड़ना...

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने सोरेन सरकार पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं।
झारखंड हाईकोर्ट ने सोरेन सरकार को दी टेंशन, माइनर्स से दुष्कर्म व प्रताड़ना...
हेमंत सोरेन और झारखंड हाईकोर्ट (फोटो-सोशल मीडिया)
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Jharkhand News: झारंखड में पिछले 10 हेमंत सोरेन के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन की सरकार चल रही है। राज्य में महिला अपराधों में लगातार इजाफा हो रहा है। अब एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार को टेंशन दे दिया है। हाईकोर्ट ने राज्य में महिलाओं एवं नाबालिगों के साथ दुष्कर्म और प्रताड़ना की घटनाओं पर रोक के लिए सरकार के प्रयासों को नाकाफी बताया है।

बुधवार को एक जनहित याचिका पर सुनावाई कर रही हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की बेंच ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई है। बेंच ने महिलाओं एंव बच्चों की सुरक्षा के संबंध में राज्य सरकार की तरफ से पेश किए गए शपथ पत्र पर असंतोष जाहिर किया है। साथ ही कहा कि झारखंड सरकार हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन नहीं कर रही है, बल्कि औपचारिकता कर रही है।

हाईकोर्ट ने कहा-सरकार नहीं दिख रही गंभीर

हाईकोर्ट ने कहा कि इतने संवेदनशील मामले पर भी सरकार गंभीर नहीं दिख रही है, जो निश्चित ही एक चिंता का विषय है। कोर्ट ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि वे 11 सितंबर 2024 और जनवरी 2025 को पारित कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुपालन में ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। साथ ही सभी जिलों के प्रधान एवं सत्र न्यायाधीशों को अपने-अपने क्षेत्र के किशोर सुधार गृहों का निरीक्षण कर रिपोर्ट कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया गया।

स्कूलों में बच्चियों की सुरक्षा के लिए नहीं उठाए गए प्रभावी कदम

वहीं याचिकाकर्ता कौशल भारती की ओर से अदालत को बताया गया कि बच्चों, विशेष रूप से बच्चियों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल दिखावे के लिए जवाब दाखिल किया है, जबकि वास्तविकता यह है कि न तो व्यवस्था में सुधार हुआ है और न ही सुरक्षा उपायों में ईमानदारी दिखाई दे रही है।

ज्यादातर स्कूलों में खराब हैं सीसीटीवी कैमरे

दरअसल, हाई कोर्ट ने पूर्व में राज्य सरकार को महिला और बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर करीब पांच बिंदुओं पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसमें राजधानी के प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और खराब कैमरों की मरम्मत, स्कूल बसों में महिला स्टाफ की तैनाती, स्कूलों में कंप्लेन बॉक्स रखने, महिलाओं और बच्चों के लिए इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार-प्रसार करने जैसे निर्देश शामिल थे।

-एजेंसी इनपुट के साथ

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