

Mehbooba Mufti Slams Yogi Government: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार विपक्ष के निशाने पर हैं। इस बीच जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने योगी सरकार की आलोचना की है।
महबूबा मुफ्ती ने जौहर यूनिवर्सिटी पर यूपी सरकार की कार्रवाई को नफरत और बदले की कार्रवाई कहा है। मुफ्ती ने सीएम योगी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन से सीख लेने की सलाह दी है।
महबूबा मुफ्ती ने रविवार को अपने एक्स हैंडल पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पोस्ट शेयर किया। जौहर विश्वविद्यालय पर प्रदेश सरकार की कार्रवाई का विरोध करते हुए मुफ्ती ने लिखा कि जौहर यूनिवर्सिटी जैसे शिक्षण संस्थान को नष्ट करना नफरत और बदले की भावना के अलावा और कुछ नहीं दिखाता।
आगे उन्होंने लिखा कि योगी को जंतर-मंतर से सीख लेनी चाहिए और देखना चाहिए कि देश के युवा किस तरह नफरत और बंटवारे की राजनीति को नकार रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी जौहर विश्वविद्यालय मामले में यूपी सरकार के विरोध में उतर आए हैं। सरकार की कार्रवाई का विरोध करते हुए अखिलेश ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ’शिक्षा की रक्षा’ आंदोलन भी जीतेगा! रामपुर के जौहर विश्वविद्यालय को बचाने के लिए धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं की हौसलाअफजाई के लिए हमारे सांसद व विधायक शामिल हैं।
अखिलेश ने प्रदेश सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि जब यूपी सरकार के शासनादेश के आधार पर भाजपा सरकार अन्य निर्माणों का नियमतीकरण कर सकती है तो जौहर यूनिवर्सिटी का क्यों नहीं, जौहर यूनिवर्सिटी के साथ भेदभाव-दुराव क्यों? हम सबकी मांग है कि भाजपा अपने प्रतिशोध की आग में नौजवानों का भविष्य न झोंके।
यूपी में भू-उपयोग नियमों के उल्लंघन और अवैध निर्माण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सरकार लगातार सख्ती से कार्रवाई कर रही है। इसी के तहत रामपुर विकास प्राधिकरण ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बिना नक्शे की स्वीकृति के निर्मित भवनों के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है।
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27(1) के तहत की गई है। आदेश में विस्तृत सुनवाई और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद विश्वविद्यालय परिसर में बने 38 भवनों को अवैध निर्माण की श्रेणी में माना गया और ध्वस्तीकरण के आदेश दिया गया है।