

उत्तरकाशी: उत्तरकाशी (Uttrakashi) में टनल (Silkyara Tunnel) के भीतर फंसे 41 लोगों को अब जहां 8 दिन पूरे हो चुके हैं। हालांकि आज भी रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। वहीं बीते रविवार को केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी (Nitin gadkari) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने टनल के निरीक्षण के बाद कहा कि अब 6 विकल्पों पर काम चल रहा है और इस पूरे ऑपरेशन में दो से ढाई दिन का वक्त और भी लग सकता है।
इसके तहत श्रमिकों के लिए 'एस्केप पैसेज' तैयार करने के लिए ड्रिलिंग रविवार को भी स्थगित रही। फंसे लोगों को जरूरी सामान की आपूर्ति के लिए मलबे में एक और बड़े व्यास की पाइपलाइन डाली जा रही है।
जानकारी दें कि बीते शुक्रवार दोपहार को छोटी मशीन की जगह मलबा भेदने के लिए लाई गयी अमेरिकी आगर मशीन से ड्रिलिंग के दौरान किसी कठोर सतह से टकराने के बाद रोक दिया गया था। उस समय तक मशीन मलबे में 22 मीटर तक ड्रिलिंग करने के बाद छह मीटर लंबे चार पाइप डाल चुकी थी और पांचवें पाइप को डाले जाने की कार्यवाही गतिमान थी।
ऐसे में अब बचाव अभियान में आयी रुकावट के बाद अधिकारियों ने बीते शनिवार को श्रमिकों तक जल्द पहुंचने के लिए सुरंग के उपर से 'वर्टिकल' ड्रिलिंग करने की तैयारी शुरू की। हालांकि श्रमिक सुरंग के अंदर ऐसे स्थान पर फंसे हैं जहां वे आसपास घूम सकते हैं। उनके पास खुली जगह, बिजली, खाना, पानी और आक्सीजन है। लेकिन अब अगर जल्दी उन्हें नहीं निकाला गया तो खतरा बढ़ सकता है। साथ ही मजदूरों को वहां कई तरह की बीमारियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
बताते चलें कि उत्तरकाशी में बीते 12 नवंबर को दिवाली के दिन निर्माणाधीन सुरंग का सिलक्यारा की ओर से मुहाने से 270 मीटर अंदर करीब 30 मीटर का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था और तब से 41 श्रमिक उसके अंदर ही फंसे हुए हैं। फिलहाल उन्हें निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव एवं राहत अभियान चलाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस पूरे ऑपरेशन में फिलहाल दो से ढाई दिन का और भी वक्त लग सकता है।