पवन कल्याण ने सरकारी जमीन पर किया कब्जा! के. कविता के आरोपों से मचा हड़कंप, रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर खरीदी जमीन

K Kavitha: कविता ने कहा कि 2014 में तेलंगाना राज्य के गठन के समय पवन कल्याण ने 10 एकड़ 'शिकम' भूमि खरीदी थी। उन्होंने दावा किया कि यह भूमि कोडिकुंटा झील के सर्वे नंबर 706 से संबंधित है।
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के. कविता (फोटो - सोशल मीडिया )
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Telangana Politics: तेलंगाना की राजनीति में जमीन विवाद को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। तेलंगाना जागृति की संस्थापक एवं अध्यक्ष कलवकुंतला कविता ने आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण पर शिकम भूमि खरीदने और उससे जुड़े रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

हैदराबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कविता ने कहा कि 2014 में तेलंगाना राज्य के गठन के समय पवन कल्याण ने 10 एकड़ 'शिकम' भूमि खरीदी थी। उन्होंने दावा किया कि यह भूमि कोडिकुंटा झील के सर्वे नंबर 706 से संबंधित है, और सिंचाई विभाग ने पहले ही अपने अंतिम अधिसूचना (फाइनल नोटिफिकेशन) में स्पष्ट कर दिया था कि यह जमीन 'शिकम' श्रेणी में आती है।

तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया

कविता ने आरोप लगाया कि भूमि खरीद के समय सरकारी रिकॉर्ड में तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उनके अनुसार, पवन कल्याण की ओर से भूमि पंजीकरण के दौरान यह दर्ज कराया गया कि केवल तीन एकड़ जमीन शिकम है जबकि शेष सात एकड़ सिंचित या मगाणी भूमि है। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग के दस्तावेजों में पूरी 10 एकड़ भूमि को शिकम भूमि बताया गया है और इसके प्रमाण उनके पास मौजूद हैं।

अपना वादा निभाने की मांग

पूर्व सांसद ने दावा किया कि जब उन्होंने हाल ही में पवन कल्याण से इस मुद्दे पर बातचीत की, तो उन्होंने कथित रूप से कहा था कि यदि उनकी ओर से कोई गलती हुई है तो वह जमीन सरकार को वापस कर देंगे। इसी आधार पर कविता ने उनसे अपना वादा निभाने की मांग की।

उन्होंने राज्य सरकार से भी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। के कविता ने कहा कि सरकार के पास पहले से ही संबंधित रिकॉर्ड और डेटा उपलब्ध हैं, इसलिए मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार किसानों से भूमि अधिग्रहित करती है तो मुआवजा देती है, इसलिए नियमों के अनुसार पवन कल्याण को भी उचित मुआवजा या टीडीआर मिल सकता है।

कविता ने आरोप लगाया कि संबंधित भूमि पर बाड़ लगाई गई है जबकि शिकम भूमि पर इस प्रकार का निर्माण या घेराबंदी नियमों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जमीन पर मिट्टी डाली गई, जिससे झील क्षेत्र प्रभावित हुआ। उन्होंने मांग की कि वहां की गई फेंसिंग और डाली गई मिट्टी को भी हटाया जाए। -एजेंसी इनपुट के साथ

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