सेना में महिलाओं की बड़ी जीत, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा आर्मी पर केवल पुरुषों का एकाधिकार नहीं?

CJI Suryakant: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना में महिला SSC अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बेंच ने स्पष्ट किया कि सेना पर केवल पुरुषों का एकाधिकार नहीं हो सकता।
Women SSC Officers
सांकेतिक तस्वीर (AI)
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Women SSC Officers: भारतीय सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) वाली महिला अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अपने विशेष अधिकार यानी अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए उन महिला अधिकारियों को न्याय दिया, जिन्हें परमानेंट कमीशन (PC) देने से इनकार कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन महिला अधिकारियों ने सेवा से हटाए जाने को चुनौती दी थी, उन्हें 20 साल की सेवा के बराबर पेंशन का हकदार माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी माना कि सेना में “प्रणालीगत भेदभाव” (Systemic Discrimination) के कारण महिलाओं को परमानेंट कमीशन नहीं मिल पाया।

“सेना में पुरुषों का एकाधिकार नहीं हो सकता”

अदालत ने कहा कि अवसरों की कमी ने महिला अधिकारियों के करियर और उनकी क्षमता को प्रभावित किया। उन्हें गलत तरीके से लंबी अवधि की सेवा के लिए ‘अनफिट’ माना गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आर्मी में केवल पुरुष अधिकारियों का एकाधिकार नहीं हो सकता और सभी पदों पर सिर्फ पुरुषों का दावा नहीं बनता।

पेंशन को लेकर बड़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार के उपाय के तौर पर कहा कि जो महिला अधिकारी कानूनी प्रक्रिया के दौरान सेवा से बाहर हो गई थीं, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी करने वाला माना जाएगा और वे पेंशन की हकदार होंगी। हालांकि, उन्हें पिछला बकाया वेतन (एरियर) नहीं मिलेगा। यह फैसला JAG (जज एडवोकेट जनरल) और AEC (आर्मी एजुकेशन कोर) कैडर की महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि चयन प्रक्रिया और कट-ऑफ मानकों की समीक्षा की जाए ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

क्या है पूरा मामला?

यह फैसला आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल के जुलाई 2024 के उस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर आया, जिसमें महिला SSC अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने से इनकार किया गया था।

महिला अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि स्थायी कमीशन देने में उनके साथ पुरुष अधिकारियों के मुकाबले भेदभाव किया जा रहा है। उनका आरोप था कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से समान अवसर नहीं दिए गए। इस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए महिला अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाया।

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