

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ (Teesta Setalvad) को शनिवार (1 जुलाई) को अंतरिम राहत दी है।सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने तीस्ता सीतलवाड़ को आत्मसमर्पण का निर्देश देने वाले उच्च न्यायालय के आदेश पर एक सप्ताह के लिए रोक लगाई। इससे पहले आज ही गुजरात हाई कोर्ट ने गुजरात दंगे से जुड़े झूठे सबूत देने के मामले में तीस्ता सीतलवाड़ की नियमित जमानत खारिज कर दी थी और उन्हें तुरंत आत्मसमर्पण करने के लिए कहा था।
सीतलवाड़ के तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सी यू सिंह ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनकी मुवक्किल को पिछले वर्ष 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी। उन्होंने कहा कि सीतलवाड़ ने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है।
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इस मामले पर तीन जजों की पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि सीतलवाड़ दस महीने से जमानत पर थीं। गिरफ्तारी से राहत के लिए तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय ने जो किया उससे हम आश्चर्यचकित हैं, (ऐसी) क्या चिंताजनक तात्कालिकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सवाल यह है, 'अगर उच्च न्यायालय तीस्ता सीतलवाड़ को गिरफ्तारी से राहत प्रदान कर देता तो क्या आसमान गिर जाता।'
सुनवाई के दौरान अदालत ने सीतलवाड़ को उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए समय नहीं देने पर सवाल उठाया और कहा कि सामान्य अपराधी भी कुछ अंतरिम राहत का हकदार होता है।
गुजरात उच्च न्यायालय ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की नियमित जमानत याचिका शनिवार को खारिज कर दी और उन्हें 2002 के गोधराकांड के बाद हुए दंगों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए सुबूत गढ़ने से जुड़े एक मामले में तत्काल आत्मसमर्पण करने को कहा।