Explainer: अचानक क्यों तैनात किए गए 12 बम? बदल गई भारत की न्यूक्लियर पॉलिसी, चीन कैसे बना पाक से बड़ा खतरा

India Nuclear Weapons: SIPRI की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अपनी परमाणु ताकत बढ़ाते हुए हथियारों की संख्या 190 कर ली है। चीन-पाकिस्तान की चुनौतियों के बीच रणनीतिक तैनाती में बड़ा बदलाव किया है।
SIPRI Yearbook 2026 India Nuclear
परमाणु क्षमता बढ़ा रहा भारत (AI जनरेटेड फोटो)
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SIPRI Yearbook 2026 India Nuclear: दुनिया इस समय कई बड़े संघर्षों और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है। एक तरफ यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध जारी है, दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है। वहीं इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी सैन्य प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत की परमाणु नीति को लेकर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है, जिसने रणनीतिक विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है।

इसी बीच स्वीडन के मशहूर रिसर्च इंस्टीट्यूट स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (SIPRI) ने भारत के परमाणु कार्यक्रम पर अपनी एक रिपोर्ट पेश की है। SIPRI की ईयरबुक 2026 के मुताबिक भारत ने अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाई है। साथ ही उनकी तैनाती के तरीके में भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। यह बदलाव केवल हथियारों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की बदलती सुरक्षा जरूरतों और क्षेत्रीय चुनौतियों को भी दर्शाता है। अब सवाल उठता है कि भारत ने अचानक परमाणु हथियारों की संख्या क्यों बढ़ा दी? इसके पीछे क्या कारण हैं?

भारत के पास कितने परमाणु हथियार हैं?

SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास 2026 में लगभग 190 परमाणु हथियार हैं। जो कुछ साल पहले तक यह संख्या करीब 164 थी, जबकि 2025 में इसे लगभग 180 बताया गया था। यानी भारत ने पिछले कुछ सालों में धीरे-धीरे अपने परमाणु हथियारों का विस्तार किया है। हालांकि, यह संख्या अभी भी अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की तुलना में काफी कम है, लेकिन भारत की रणनीति कभी भी हथियारों की संख्या बढ़ाने की दौड़ पर आधारित नहीं रही है।

SIPRI india report
परमाणु हथियारों में बढ़ोतरी कर रहा भारत (AI जनरेटेड फोटो)

भारत का मकसद हमेशा यह सुनिश्चित करना रहा है कि उसके पास इतनी क्षमता हो कि किसी भी हमले की स्थिति में वह प्रभावी जवाब दे सके। इसी वजह है कि जानकार भारत द्वारा परमाणु हथियारों की वृद्धि को सिर्फ एक आम बढ़ोतरी नहीं, बल्कि सुरक्षा के नजरिए से बदलती हुई रणनीति के संकेत मान रहे हैं।

मिसाइलों के साथ परमाणु हथियारों की तैनाती

रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत ने कथित तौर पर पहली बार शांतिकाल में कुछ परमाणु हथियारों को मिसाइलों के साथ तैनात किया है। आमतौर पर भारत अपने परमाणु वॉरहेड और मिसाइलों को अलग-अलग रखता था। इस व्यवस्था से किसी दुर्घटना या गलती से परमाणु हथियार के इस्तेमाल का खतरा कम रहता था।

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भारत ने पाक-चीन सीमा पर तैनात किए परमाणु वारहेड (AI जनरेटेड फोटो)

लेकिन इस व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी भी थी। अगर अचानक कोई गंभीर संकट पैदा हो जाए तो हथियारों को सक्रिय करने में समय लग सकता था। इसके उलट अगर वॉरहेड पहले से मिसाइल पर लगे हों तो जवाबी कार्रवाई बहुत तेजी से की जा सकती है। SIPRI का मानना है कि भारत ने सीमित संख्या में ऐसी तैनाती शुरू की है। यदि यह सही है तो यह भारत की परमाणु तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा।

युद्ध लड़ना नहीं, रोकना असली मकसद

परमाणु हथियारों का असली मकसद युद्ध लड़ना नहीं बल्कि युद्ध को रोकना होता है। इसे सैन्य भाषा में ‘डिटरेंस’ या प्रतिरोध क्षमता कहा जाता है। इसका अर्थ है कि किसी भी संभावित दुश्मन को यह स्पष्ट संदेश देना कि यदि वह हमला करेगा तो उसे भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। यही कारण है कि किसी भी परमाणु शक्ति के लिए ‘सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी’ यानी पहले हमले के बाद भी जवाब देने की क्षमता को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर कोई देश पहले हमले के बाद भी जवाबी हमला करने में सक्षम है, तो उसके खिलाफ परमाणु हमला करने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। भारत पिछले दो दशकों से इसी क्षमता को मजबूत करने पर काम कर रहा है।

कैसे जवाबी कार्रवाई कर सकता है भारत?

भारत के पास जमीन से दागी जाने वाली अग्नि सीरीज की मिसाइलें हैं। भारतीय वायुसेना के कुछ लड़ाकू विमान परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। इसके अलावा समुद्र में मौजूद परमाणु पनडुब्बियां भारत की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं।

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समुद्र में तैनात है परमाणु पनडुब्बियां (सोर्स- सोशल मीडिया)

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी दुश्मन देश द्वारा जमीन पर मौजूद मिसाइल ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाया भी जाए, तब भी समुद्र में तैनात पनडुब्बियां जवाबी हमला कर सकती हैं। यही किसी देश की वास्तविक परमाणु सुरक्षा मानी जाती है। इसके अलावा भारत की परमाणु पनडुब्बियां जैसे INS Arihant और INS Arihant इस क्षमता की आधारशिला हैं। आने वाले सालों में नई पनडुब्बियों के शामिल होने से यह क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है।

पाकिस्तान सबसे बड़ी परेशानी

भारत की सुरक्षा चिंताओं में पाकिस्तान भी एक महत्वपूर्ण कारण है। पाकिस्तान ने पिछले कुछ सालों में छोटे और कम दूरी वाले टैक्टिकल परमाणु हथियारों पर खास ध्यान दिया है। इनमें NASR या हत्फ-9 मिसाइल प्रमुख मानी जाती है।

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पाकिस्तान लगातार अपनी न्यूक्लियर क्षमता बढ़ा रहा है (सोर्स- सोशल मीडिया)

इन हथियारों का उद्देश्य बड़े शहरों पर हमला करना नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में सीमित दूरी पर इस्तेमाल करना माना जाता है। कई भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हथियार संकट के समय जोखिम बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इनके इस्तेमाल की संभावना अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है। इसी वजह से भारत अपनी जवाबी कार्रवाई की क्षमता को और अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर काम कर रहा है ताकि किसी भी प्रकार के परमाणु दबाव का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

चीन ने परमाणु भारत की असली चुनौती

चीन ने पिछले कुछ सालों में अपने परमाणु कार्यक्रम का तेजी से विस्तार किया है। SIPRI के मुताबिक चीन के पास 620 से अधिक परमाणु हथियार हैं और उसकी क्षमता लगातार बढ़ रही है। चीन नई लंबी दूरी की मिसाइलें, आधुनिक कमांड सिस्टम और नए मिसाइल साइलो भी विकसित कर रहा है।

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चीन की बढ़ती परमाणु क्षमता भारत की असली समस्या (AI जनरेटेड फोटो)

इसके अलावा तिब्बत और पश्चिमी चीन में सैन्य ढांचे के विस्तार तथा पूर्वी लद्दाख में 2020 के बाद बढ़े तनाव ने भारत की चिंताओं को और गहरा किया है। भारत के रणनीतिक योजनाकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक तैयारी आवश्यक होगी।

क्या दुनिया में फिर छिड़ने वाली ही परमाणु प्रतिस्पर्धा?

SIPRI की रिपोर्ट की से कहा जा सकता है कि दुनिया में एक बार फिर से परमाणु रेस शुरू होने जा रही हैं। जहां कोई भी देश किसी से पीछे नहीं रहना चाहता। कोल्ड वॉर खत्म होने के बाद कई सालों तक परमाणु हथियारों की संख्या में कमी आ रही थी, लेकिन अब अमेरिका, रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया समेत कई देश अपने परमाणु कार्यक्रमों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। हालांकि, भारत आज भी 1998 की अपनी ‘नो फर्स्ट यूज पॉलिसी’ पर कायम है।

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