सिक्किम के भारत में विलय के 51 साल, राजशाही के अंत से जैविक क्रांति तक, जानें हिमालयी राज्य का गौरवशाली सफर

51 years of Sikkim: 16 मई 1975 को सिक्किम आधिकारिक तौर पर भारत का 22वां राज्य बना था। आज अपनी 51वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर, यह हिमालयी राज्य अब आधुनिक विकास की एक अनूठी मिसाल पेश कर रहा है।
Sikkim Statehood Day 2026
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- एआई
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Sikkim Statehood Day 2026: आज से ठीक 51 साल पहले, 16 मई 1975 को सिक्किम के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा था। हिमालय की गोद में बसा यह छोटा सा राज्य, जो कभी अपनी अलग राजशाही और संप्रभुता के लिए जाना जाता था, भारत गणराज्य का अभिन्न अंग बना।

चोग्याल वंश के शासन से लेकर दुनिया के पहले 100% जैविक राज्य बनने तक का सिक्किम का यह सफर संघर्ष, दूरदर्शिता और प्रकृति के साथ संतुलन की एक अद्भुत कहानी है।

चोग्याल शासन और ब्रिटिश काल का प्रभाव

सिक्किम पर 1642 से लेकर 1975 तक नामग्याल वंश का शासन रहा, जिसके शासकों को 'चोग्याल' कहा जाता था। ब्रिटिश शासन के दौरान भी सिक्किम पूरी तरह भारत का हिस्सा नहीं था। 1817 की तितालिया संधि और 1861 की तुमलोंग संधि ने यहां ब्रिटिश प्रभाव को बढ़ाया, जबकि 1890 के कलकत्ता कन्वेंशन के माध्यम से सिक्किम और तिब्बत की सीमाओं का निर्धारण किया गया। 1947 में भारत की आजादी के बाद, 1950 की संधि के तहत सिक्किम भारत का एक 'प्रोटेक्टोरेट' (संरक्षित राज्य) बना, जिसकी रक्षा और विदेश नीति की जिम्मेदारी भारत ने संभाली।

जनमत संग्रह और ऐतिहासिक विलय

सिक्किम में लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग 1970 के दशक में तेज होने लगी। लोगों की आकांक्षाओं को देखते हुए 1974 में भारतीय संसद ने 35वें संविधान संशोधन के जरिए सिक्किम को 'सह-राज्य' का दर्जा दिया। हालांकि, पूर्ण लोकतंत्र की चाह में अप्रैल 1975 में एक जनमत संग्रह कराया गया। जनमत संग्रह में 97 प्रतिशत से अधिक जनता ने राजशाही खत्म करने और भारत में पूर्ण विलय के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद 36वें संविधान संशोधन के माध्यम से 16 मई 1975 को सिक्किम भारत का 22वां राज्य घोषित किया गया।

अनुच्छेद 371एफ और विशेष पहचान

सिक्किम के भारत में विलय के समय उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को बनाए रखने के लिए भारतीय संविधान में अनुच्छेद 371एफ जोड़ा गया। यह विशेष प्रावधान सिक्किम के मूल निवासियों के भूमि अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करता है। इसके अलावा, सिक्किम भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ के मूल निवासियों को आयकर में विशेष छूट प्रदान की जाती है।

दुनिया का पहला 100% ऑर्गेनिक राज्य

सिक्किम ने न केवल राजनीतिक बल्कि पर्यावरणीय स्तर पर भी दुनिया को राह दिखाई है। साल 2016 में सिक्किम दुनिया का पहला 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक (जैविक) राज्य बना। इस क्रांति की नींव 2003 में रखी गई थी, जब राज्य सरकार ने रासायनिक खादों और कीटनाशकों को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया था। आज सिक्किम के किसान पूरी तरह जैविक खेती पर निर्भर हैं, जो टिकाऊ विकास का एक वैश्विक मॉडल बन चुका है।

सिक्किम भौगोलिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां भारत की सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा स्थित है। तीस्ता नदी को राज्य की जीवनरेखा माना जाता है। कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को ने भारत का पहला 'मिश्रित विश्व धरोहर स्थल' घोषित किया है, क्योंकि यह प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ गहरी सांस्कृतिक विरासत को भी समेटे हुए है। लाल पांडा और नीली भेड़ जैसे दुर्लभ जीव यहाँ की जैव विविधता को और भी खास बनाते हैं।

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