

Shashi Tharoor Angry with Rahul Gandhi: केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर आज होने वाली कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक से पहले शशि थरूर की नाराजगी की खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, थरूर आज राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ प्रस्तावित बैठक में शामिल नहीं होंगे और फिलहाल केरल में ही मौजूद हैं। आज दोपहर 2:30 बजे दिल्ली में केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ कांग्रेस आलाकमान की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है।
मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया, थरूर हाल ही में कोच्चि में राहुल गांधी की महापंचायत के दौरान हुए व्यवहार से नाराज हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्हें राहुल गांधी के आगमन से पहले अपना भाषण खत्म करने को कहा गया, जिसे थरूर ने ‘उचित सम्मान न मिलने’ के रूप में लिया। यही कारण है कि वे पार्टी आलाकमान के साथ इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं।
कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में विधानसभा चुनाव से पहले थरूर की नाराजगी पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। शशि थरूर राज्य में एक लोकप्रिय चेहरा हैं और शहरी मध्यम वर्ग तथा युवा मतदाताओं में उनकी खास पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनका अहम बैठकों से दूर रहना पार्टी के रणनीतिक हितों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। फिलहाल, कांग्रेस नेतृत्व भीतरखाने प्रयास कर रहा है कि मतभेद बढ़ने से पहले सुलझा लिया जाए। थरूर की गैरहाजिरी ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर असंतोष की आंच अभी ठंडी नहीं हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस इस स्थिति से कैसे निपटती है और क्या थरूर को मनाने की कोशिशें सफल होती हैं।
शशि थरूर के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि वे आज, 23 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली केरल कांग्रेस की अहम चुनावी तैयारी बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। कार्यालय के बयान के मुताबिक, थरूर इस समय कालीकट में केरल लिटरेचर फेस्टिवल में व्यस्त हैं, जो एशिया का सबसे बड़ा साहित्य महोत्सव है। बयान में कहा गया है कि थरूर अपनी नवीनतम पुस्तक पर बोल रहे हैं, जो श्री नारायण गुरु पर आधारित है। उन्होंने पार्टी को पहले ही सूचित कर दिया था कि वे बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे।
इससे पहले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा था, “मैं यह नहीं कहूंगा कि मोदी सरकार लोकतंत्र के खिलाफ है, लेकिन वह निश्चित तौर पर नेहरू-विरोधी जरूर है। नेहरू को एक आसान बलि का बकरा बना दिया गया है।” उन्होंने कहा कि वह भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण के बड़े प्रशंसक हैं, लेकिन नेहरू की हर सोच और नीति का बिना सवाल उठाए समर्थन करना संभव नहीं है। थरूर ने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, मगर देश की हर समस्या के लिए उन्हें अकेले जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत और अनुचित है।