

Rohit Pawar Meets Sonia Gandhi And Mallikarjun Kharge: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। अजित पवार के साथ हुए संदिग्ध विमान हादसे को लेकर रोहित पवार ने दिल्ली का रुख किया और कांग्रेस की शीर्ष लीडरशिप से मुलाकात कर इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।
रोहित पवार ने बताया कि दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी और वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। रोहित ने कहा कि खड़गे जी ने सोनिया गांधी को इस पूरे हादसे की गंभीरता से अवगत कराया। इसके अलावा, रोहित पवार ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भी इस घटनाक्रम की जानकारी दी। सभी दिग्गज नेताओं ने इस दुर्घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और न्याय दिलाने में सहयोग का आश्वासन दिया है।
रोहित पवार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि अजित पवार के प्लेन क्रैश पर बात करने के लिए दिल्ली में कुछ सांसदों से मिलते समय, सीनियर कांग्रेस लीडर सोनिया गांधी और कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिार्जुन खड़गे साहब भी उनसे मिले। इस समय, खड़गे ने सोनिया गांधी को कल की मीटिंग में हुई डिटेल में बातचीत के बारे में बताया और कहा कि यह बहुत सीरियस मामला है।
रोहित पवार ने महाराष्ट्र और केंद्र की 'डबल इंजन' सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकारें एक ही विचार की होती हैं, तो उम्मीद की जाती है कि राज्य के प्रस्तावों पर केंद्र तुरंत मुहर लगाएगा। लेकिन ताज्जुब की बात है कि अजित दादा जैसे बड़े जननेता के साथ हुए हादसे की CBI जांच की मांग पर केंद्र सरकार चुप्पी साधे बैठी है।
रोहित पवार ने तुलना करते हुए पूछा कि सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में जब बिहार सरकार ने सिफारिश की थी, तब केंद्र ने मात्र दो दिनों के भीतर CBI जांच शुरू कर दी थी। फिर अजित दादा के मामले में वही तत्परता क्यों नहीं दिखाई जा रही? क्या केंद्र की नजर में यह मामला गंभीर नहीं है?
रोहित पवार ने अजित पवार गुट के विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री को दिए गए 'स्मरण पत्र' पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि यह आभार की बात है कि विधायक सक्रिय हैं, लेकिन सरकार में शामिल होने के बावजूद अगर आपको अपनी ही सरकार को याद दिलाना पड़े, तो यह सोचने वाली बात है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल लेटर देने से काम नहीं चलेगा, इसके लिए पूरी ताकत के साथ लड़ना होगा।