दिल्ली में स्वाती मालिवाल ने डुबाई केजरीवाल की लुटिया, पंजाब में राघव बिगाडे़ंगे मान का खेल! AAP में घमासान

Raghav Chadha Controversy: राघव चड्ढा और AAP के बीच आर-पार! राज्यसभा उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव का 'विद्रोही' अंदाज, 'खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं'। जानें अंदरूनी कलह की पूरी कहानी।
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अरविंद केजरीवाल, राघव चड्ढा, भगवंत मान
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Raghav Chadha Vs AAP: अरविंद केजरीवाल के करीबी रणनीतिकार माने जाने वाले राज्यसभा सांसद Raghav Chadha की पार्टी से दूरी अचानक नहीं बनी, बल्कि इसकी शुरुआत दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान ही हो गई थी। पार्टी की गतिविधियों और प्रदर्शनों से उनकी लगातार गैरमौजूदगी ने संकेत दे दिया था कि उन पर भरोसा कम हो रहा है। इस पर मुहर तब लगी जब आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया।

लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भी राघव चड्ढा(Raghav Chadha) लंबे समय तक विदेश में रहे। दिल्ली के कथित शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं को फरवरी में राहत मिलने के बाद भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जंतर-मंतर पर आयोजित पार्टी की रैली से भी वे दूर रहे।

आप और राघव के बीच बढ़ती दूरी

पार्टी सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा काफी समय से सक्रिय राजनीति में कम दिखाई दे रहे थे और पार्टी लाइन से अलग रुख अपना रहे थे। उनके बीजेपी के करीब होने की अटकलों ने भी नेतृत्व को असहज किया। संसद में भी वे पार्टी के मुख्य एजेंडे के बजाय अन्य मुद्दे उठाते रहे, जिससे मतभेद और बढ़ गए। अंततः नेतृत्व ने उन्हें उपनेता पद से हटाने का फैसला किया। लोकसभा चुनाव के दौरान जब अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था, तब भी राघव विदेश में थे। पार्टी लाइन से अलग बयान, संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी और नेतृत्व से बिना चर्चा के संसद में मुद्दे उठाने जैसी बातों ने दूरी को और गहरा कर दिया।

अब सीमित हो सकती है भूमिका

समय के साथ यह साफ होता गया कि पार्टी और राघव चड्ढा(Raghav Chadha) के रिश्ते सामान्य नहीं हैं। यह दरार तब खुलकर सामने आई जब अदालत से पार्टी नेताओं को राहत मिलने के बाद बाकी नेताओं ने बयान दिए, लेकिन राघव चुप रहे। इससे संकेत मिला कि पार्टी में उनकी सक्रिय भूमिका अब सीमित हो सकती है।

पंजाब चुनाव पर असर?

जिस तरह स्वाती मालिवाल ने दिल्ली चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए थे, उसी तरह यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या आने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राघव चड्ढा भी अलग रुख अपना सकते हैं।

पार्टी नेताओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर बीजेपी की ओर से उन्हें समर्थन मिल रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि राघव चड्ढा आगे क्या रणनीति अपनाते हैं, क्योंकि मौजूदा हालात में आम आदमी पार्टी और उनके बीच टकराव खुलकर सामने आता दिख रहा है।

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