

नई दिल्ली : भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार 11 मई को एक भावनात्मक दृश्य देखने को मिला। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर "इंदिरा होना आसान नहीं" और "इंडिया मिसेज इंदिरा" जैसे नारे लिखे पोस्टर लगे, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की याद दिलाई गई।
ये पोस्टर ऐसे समय में सामने आए हैं जब बीते 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद भारत पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव का सामना कर रहा है जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। इससे पहले शनिवार को कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व को याद किया।
सोशल मीडिया प्लैटफॉर्मे एक्स पर एक पोस्ट में वेणुगोपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुरानी तस्वीरें पोस्ट कीं, जिसमें लिखा था, "एक विकासशील देश होने के नाते, हमारी रीढ़ मजबूत है, सभी अत्याचारों से लड़ने के लिए पर्याप्त इच्छाशक्ति और संसाधन हैं। वह समय बीत चुका है जब 3-4 हजार मील दूर बैठा कोई भी देश भारतीयों को आदेश दे सकता था। आज भारत को इंदिरा गांधी जी की बहुत याद आती है!"
अशोक गहलोत ने भी फेसबुक पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुरानी तस्वीरें पोस्ट कीं, जिसमें उन्होंने लिखा, "इंदिरा जी, आज पूरा देश आपको याद कर रहा है।" कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी एक्स पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तस्वीरें पोस्ट कीं और कैप्शन दिया, "भारत इंदिरा को याद करता है।"
1971 का भारत-पाक युद्ध, जिसमें बांग्लादेश का जन्म हुआ, इंदिरा गांधी के नेतृत्व में लड़ा गया एक ऐतिहासिक युद्ध था। भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के स्वतंत्रता संग्राम में निर्णायक भूमिका निभाई थी। पाकिस्तान द्वारा भारतीय एयरबेस पर हवाई हमले के बाद युद्ध की शुरुआत हुई थी। इंदिरा गांधी के नेतृत्व और दृढ़ संकल्प के चलते भारत ने यह युद्ध जीतकर इतिहास रच दिया था। पाक की सैन्य ताकत ध्वस्त… युद्धविराम से पहले पाकिस्तानी सेना को लगा है तगड़ा झटका, कर्नल सोफिया ने किया बड़ा खुलासा
भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई की सुबह ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। यह ऑपरेशन जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले का जवाब था, जिसके परिणामस्वरूप एक नेपाली नागरिक सहित 26 नागरिक मारे गए थे।