

NEET Re-Exam Indian Air Force: भारत में इस समय शिक्षा व्यवस्था शिक्षा मंत्रालय दोनों ही गंभीर सवालों के घेरे में है। हाल ही में आयोजित कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी की घटनाओं ने देश की परीक्षा व्यावस्था को कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। लोगों में खासकर NEET-UG 2026 और CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर गुस्सा भर गया है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में नीट री-एग्जाम को लेकर एक अहम बैठक की। इस मीटिंग की खास बात ये थी कि इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के घर पर आयोजित किया गया था। जिसमें रक्षा मंत्री के अलावा वायु सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। जिसके बाद ऐसे कयास लगाए जाने लगे कि नीट री-एग्जाम की निगरानी अब वायुसेना करेगी? आइए आपको बताते हैं कि नीट री-एग्जाम में वायु सेना की क्या भूमिका होगी? नीट परीक्षा में सेना क्यों लगानी पड़ी? और CBSE में बच्चों की आंसर शीट जांचने के लिए OSM प्रणाली कितनी सटीक है?
इस सबकी शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के बाद हुई। इस परीक्षा में करीब 22.79 लाख छात्र शामिल हुए थे। लेकिन परीक्षा के कुछ ही दिनों बाद प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया पर लीक होने की खबर सामने आई, जिसने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) परीक्षा को रद्द करते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। इसके बाद परीक्षा को रद्द कर 21 जून को री-एग्जाम करने का फैसला लिया गया।
सरकार इस बार परीक्षा की सुरक्षा में कोई कमी नहीं रहने देना चाहती। इसके चलते सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। जैसे प्रश्नपत्रों की छपाई और प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक लाने का सारा जिम्मा भारतीय सेना और वायु सेना को सौंपा गया है। जबकि पहले यह काम मुख्यतः डाक विभाग करता था। हालांकि NTA के मुताबिक, सेना की भूमिका केवल लॉजिस्टिक्स और आपातकालीन सहायता तक सीमित रहेगी।
यह फैसला CBI द्वारा मामले की जांच में सामने आए तथ्यों के बाद लिया गया है। CBI ने अपनी जांच में बताया कि, NTA से जुड़े कुछ विशेषज्ञ थे जिन्हें प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से प्रश्नपत्र से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों का एक "गेस पेपर" तैयार कर लाखों रुपये में बेचा और उसे डिजिटल माध्यमों के जरिए शेयर किया। यह दिखाता है कि समस्या केवल बाहरी गिरोहों तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली के अंदर तक पैठ बना चुकी है।
NEET विवाद के साथ-साथ CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा के रीजल्ट को लेकर भी घमासान मचा हुआ है। CBSE में इस साल पास होने वाले छात्रों के प्रतिशत में भारी गिरावट आई। जिसके बाद बड़ी संख्यां में छात्रों ने आंसर शीट री-चेक के लिए आनेदन किया। जिसके बाद छात्रों ने पाया कि उसकी कॉपियां जांचने में भारी गलतियां हुई है। छात्रों और अभिभावकों ने इसके लिए CBSE के आंसर शीट चेकिंग सिस्टम ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) जिम्मेदार बताया। कई अभिभावकों ने तो इसके लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया और ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को ही बंद करने की मांग कर दी।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम CBSE ने पहली बार लागू किया है। इस में छात्रों के आंसर शीट को स्कैन कर डिजिटल तरीके से चेक किया जाता है। छात्रों का आरोप है कि कई आंसर शीट की स्कैनिंग साफ नहीं थी, जिससे परीक्षकों को जवाब पढ़ने में कठिनाई हुई और नंबर प्रभावित हुए। कुछ छात्रों ने तो आंसर शीटस की क्वालिटी और रिकॉर्ड की गई सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए।
इसके अलावा CBSE ने इस पूरे काम की जिम्मेदारी एक प्राइवेट कंपनी को सौंपी थी। आलोचकों का कहना है कि मूल्यांकन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में तकनीकी खामियां और निजी एजेंसियों पर अत्यधिक निर्भरता छात्रों के हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:
NEET के मुकाबले IIT-JEE और UPSC की परीक्षाएं उम्मीद से अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं। IIT-JEE कई शिफ्टों में कंप्यूटर आधारित परीक्षा के रूप में आयोजित होता है, जिससे एक ही प्रश्नपत्र के लीक होने का जोखिम कम हो जाता है। इसके अलावा, प्रश्नपत्रों की कठिनाई और अलग-अलग शिफ्ट नकल या धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम कर देता है।
वहीं, UPSC की परीक्षा प्रणाली में निजी एजेंसियों की भूमिका बेहद कम है। क्योंकि UPSC परीक्षा वैकल्पिक की जगह वर्णनात्मक है ऐसे में बड़े पैमाने पर नकल या पेपर लीक का फायदा उठा पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यही वजह है कि UPSC को देश की सबसे विश्वसनीय परीक्षा प्रणालियों में गिना जाता है।