

Women Leading India's Golden Century: जब भारत अपने स्वर्णिम शतक (100वें स्वतंत्रता वर्ष) की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है, तब देश के विकास की सबसे सशक्त और बुलंद तस्वीर हमारी महिलाओं में झलकती है। नीति-निर्माण (Policy-making) से लेकर लोकप्रिय संस्कृति तक, आज हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी एक अलग और बेमिसाल पहचान बनाई है। इसी सशक्तिकरण और भविष्य के विजन को एक बड़ा मंच देने के लिए 'नवभारत विकसित भारत लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन किया जा रहा है।
भारत को साल 2047 तक एक आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने के महत्वाकांक्षी संकल्प को गति देने के लिए राजधानी दिल्ली में एक बड़ा मंच सजने जा रहा है। आगामी 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के भीकाजी कामा प्लेस में ‘नवभारत विकसित भारत लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
नवभारत-नवराष्ट्र मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव के एक बेहद खास और विशेष सत्र में देश की वो कद्दावर महिला नेत्रियां और हस्तियां एक साथ मंच साझा करेंगी, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में नेतृत्व की नई परिभाषा लिखी है। 'विकसित भारत @2047' के भव्य संकल्प में महिला नेतृत्व की भूमिका क्या होगी और वे कैसे देश को आगे ले जाएंगी, इस पर ये दिग्गज अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे।
इस विशेष सत्र में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता 'भारत की राजधानी के नेतृत्व' पर अपनी बात रखेंगी और बताएंगे कि कैसे एक वैश्विक महानगर के रूप में दिल्ली देश को नई दिशा दे रही है। वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अनुप्रिया पटेल 'भारत की एक स्वस्थ स्वर्णिम सदी' के विजन को सामने रखेंगी, जिसमें देश के हर नागरिक तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का खाका होगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इस सत्र में 'भारत के भविष्य के नेताओं के नेतृत्व' पर अपने बेबाक विचार प्रस्तुत करेंगी। उनका फोकस इस बात पर होगा कि कैसे अगली पीढ़ी के लीडर्स को तैयार किया जाए। इसके साथ ही, बॉलीवुड अभिनेत्री और सोशल एक्टिविस्ट भूमि पेडणेकर 'भारत की अगली पीढ़ी की आवाज' बनकर सिनेमा और समाज के बदलते रुख पर अपनी राय रखेंगी। यह कॉन्क्लेव सिर्फ एक चर्चा नहीं, बल्कि 2047 के उस विकसित भारत की नींव है, जहां महिलाओं की भागीदारी केवल सांकेतिक नहीं बल्कि निर्णायक होगी।
नवभारत विकसित भारत लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026 के मंच से गूंजने वाली थीम "विमेन लीडिंग इंडियाज गोल्डन सेंचुरी" (Women Leading India's Golden Century) इस बात का जीवंत प्रमाण है कि 21वीं सदी का भारत अब महिला सशक्तिकरण से आगे बढ़कर 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' (Women-Led Development) के स्वर्ण काल में प्रवेश कर चुका है।
आज देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में महिलाएं केवल सहभागी नहीं, बल्कि मुख्य नीति-निर्धारक और पथ-प्रदर्शक बनकर उभरी हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का प्रशासनिक नेतृत्व, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की राजनीतिक दूरदर्शिता, स्मृति इरानी की प्रखर निर्णय क्षमता और भूमि पेडणेकर जैसी अभिनेत्रियों का सामाजिक व सांस्कृतिक प्रभाव इस बात की तस्दीक करता है कि हर क्षेत्र के शीर्ष पायदानों पर महिलाएं देश की तकदीर बदल रही हैं।
राजनीति और शासन-प्रशासन की मुख्यधारा से लेकर सिनेमा और जमीनी सामाजिक सुधारों तक, महिलाओं का बढ़ता प्रतिनिधित्व यह साबित करता है कि आधी आबादी की क्षमता का पूरा उपयोग किए बिना भारत की स्वर्णिम सदी की कल्पना अधूरी है।
शिक्षा, विज्ञान, रक्षा और उद्यमिता जैसे हर प्रमुख क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। 'मुद्रा योजना' और 'लखपति दीदी' जैसी पहलों ने ग्रामीण और शहरी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे देश की जीडीपी में सक्रिय योगदान दे रही हैं। इसके साथ ही, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के माध्यम से राजनीति और नीति-निर्माण में उनकी हिस्सेदारी मजबूत हुई है। स्पष्ट है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीकी कुशलता और सामाजिक नेतृत्व के दम पर महिलाएं विकसित भारत की सबसे मजबूत रीढ़ बन चुकी हैं।