कश्मीरी पंडितों के दर्द की लड़ाई! महबूबा बोलीं- सिर्फ राहत ही सबकुछ नहीं, पंडितों की पहचान और सम्मान कहां

महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी ने कहा, कश्मीरी पंडितों का मुद्दा सिर्फ राहत का नहीं, सम्मान और पहचान का भी है, सरकार ठोस कदम उठाए, पंडितों से संवाद कर उनका समग्र विकास बहुत जरूरी है।
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जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती (सोर्स -सोशल मीडिया)
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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर अब महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने मुखर रुख अपनाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता वहीद पारा ने इस मुद्दे पर कहा कि सरकार को इसे केवल राहत और पुनर्वास के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। यह एक पूरे समुदाय की पीड़ा और उनके खोए सम्मान का मामला है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस समस्या को केवल माइग्रेशन संकट नहीं समझा जाए, बल्कि उनके समग्र विकास और सम्मान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

पीडीपी के नेता वहीद पारा ने कश्मीरी पंडितों के दर्द को साझा करते हुए कहा कि इस समुदाय ने न केवल अपना घर और जमीन छोड़ी है, बल्कि अपनी पहचान और सम्मान भी गंवाया है। यह समस्या केवल विस्थापन की नहीं, बल्कि एक पूरे समुदाय की अस्मिता से जुड़ी है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि जिला स्तर पर समन्वय बढ़ाया जाए और कश्मीरी पंडितों के लिए नियमित संवाद आयोजित किया जाए, ताकि उनकी समस्याओं को सीधे सुना और हल किया जा सके।

अलग-थलग नहीं, मुख्यधारा में लाने की जरूरत

वहीद पारा ने कहा कि सरकार को ऐसी नीति अपनानी चाहिए, जिससे कश्मीरी पंडित अलग-थलग न महसूस करें। उनकी शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बननी चाहिए। पीडीपी के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया और कहा कि पंडितों का दर्द किसी ने नहीं समझा है, कश्मीरी पंडितों ने यहां पर अपनी मकान, दुकान या जमीन ही नहीं छोड़ी बल्कि उन्होंने अपनी पहचान और सम्मान को भी गंवाया है। इसकी व्यवस्था छोटे स्तर से लेकर बडे़ स्तर तक करनी होगी।

सम्मान और पहचान का मुद्दा

पीडीपी नेता ने दोहराया कि यह केवल एक माइग्रेंट समस्या नहीं है। यह उनके आत्मसम्मान और पहचान का विषय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस मुद्दे को प्राथमिकता देने की मांग की। सरकार से इस मसले पर अपील  की है कि इसे केवल माइग्रेशन का संकट ही न समझा जाए बल्कि उनके आत्मसम्मान से लेकर पूरे विकास और सोशल वैल्यू के लिए भी कदम उठाने होंगे।

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