

Kiren Rijiju Congress Video: संसद में बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट कम होने का नाम नहीं ले रही है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 4 फरवरी 2026 को लोकसभा में हुए हंगामे का एक वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस सांसदों के आचरण पर सख्त आपत्ति जताई है। रिजिजू ने इसे संसद की गरिमा और पवित्रता का अपमान बताते हुए दावा किया कि उस दिन स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें कांग्रेस की महिला सांसद बैनर और तख्तियां लेकर प्रधानमंत्री की सीट के बेहद करीब नारेबाजी करती नजर आ रही हैं। रिजिजू ने इस व्यवहार को 'घटिया' बताते हुए कहा, "कांग्रेस पार्टी को अपने सांसदों के इस आचरण पर गर्व है!!" उन्होंने आगे दावा किया कि यदि भाजपा के पुरुष और महिला सांसदों को कांग्रेस सांसदों से भिड़ने से नहीं रोका गया होता, तो उस दिन सदन के भीतर "बहुत बुरा दृश्य" देखने को मिल सकता था।
यह विवाद 4 फरवरी 2026 को उस समय शुरू हुआ जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा चल रही थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना जवाब देना था। हंगामे की मुख्य वजह एक भाजपा सांसद द्वारा पूर्व कांग्रेस प्रधानमंत्रियों (जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी आदि) पर लगाए गए आरोप और किताबों से पढ़े गए कुछ बयान थे। इसके विरोध में कांग्रेस की महिला सांसदों ने सदन के वेल में प्रवेश किया और नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री की सीट को चारों तरफ से घेर लिया। जहाँ सरकार इसे संसद का अपमान बता रही है, वहीं कांग्रेस का तर्क है कि यह एक शांतिपूर्ण विरोध था।
सदन में हुए इस दुर्व्यवहार को लेकर भाजपा की महिला सांसद अब लामबंद हो गई हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र लिखकर विपक्षी महिला सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पत्र में विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी की सीट घेरने और सदन के भीतर कागज फाड़ने की घटनाओं का जिक्र किया गया है। भाजपा सांसदों का तर्क है कि इस तरह का व्यवहार संसद की लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
वीडियो साझा करते हुए किरेन रिजिजू ने इस बात पर जोर दिया कि संसद की गरिमा और पवित्रता की रक्षा करना सभी सदस्यों की एक बड़ी जिम्मेदारी है। वीडियो में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी गहमागहमी भी देखी जा सकती है। वर्तमान में, यह मामला संसद के भीतर अनुशासन और विरोध की सीमाओं को लेकर एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगा रहे हैं।