

लखनऊ: गुरुवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी से कुछ ही दूर गोंडा में डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के एक दर्जन से ज्यादा डिब्बे पटरी से उतर गए। इस दुर्घटना में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है तो वहीं 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है। यह बीते एक महीने के अंदर दूसरा ऐसा ट्रेन एक्सीडेंट है जिसमें यात्रियों को जान गंवानी पड़ी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इतनी जल्दी जल्दी हो रहे हादसों के पीछे सिस्टम का फेल्योर है या फिर कोई साजिश?
इसी साल पीएम मोदी 3.0 और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 2.0 में 17 जून को न्यूजलपाईगुड़ी में कंचनजंगा एक्सप्रेस को मालगाड़ी ने पीछे से टक्कर मार दी थी। इस हादसे में 10 लोगों की जान गई थी तो वहीं 50 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। हादसे की जांच में पता चला है कि सिग्नल तीन घंटे से ख़राब था। जिसकी वजह से यह रेल हादसा हुआ। लेकिन गोंडा में डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस के 12 डिब्बे पटरी से डीरेल होने के पीछे वजह अभी साफ नहीं हो सकी है। हादसे की जांच होगी तब शायद इसके पीछे के कारणों का खुलासा हो सकेगा।
वहीं, कुछ लोग इस हादसे को साजिश करार देने लगे हैं। इसके पीछे जो भी तर्क दिए जा रहे हैं वह आपको हैरान कर देंगे। सोशल मीडिया पर एक धड़ा यह कह रहा है कि अश्विनी वैष्णव के जन्मदिन के दिन यह हादसा हुआ है इसलिए यह साजिश हो सकता है सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए।
इसके साथ ही कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। जिनमें दावा किया जा रहा है कि ट्रेन को पटरी से उतारने के लिए पटरी पर लोहे की रॉड और पत्थर वगैरह डाले जा रहे हैं। जिससे ट्रेन डीरेल हो जाए। उधर रेलवे ने भी दावा किया है कि डिब्बों के डीरेल होने से पहले धमाका हुआ था। यानी कि हो सकता है कि ट्रैक पर रॉड या विस्फोटक वगैरह रखा गया हो!
हादसे को लेकर साजिश की आशंका जताते हुए जो यूजर एक्स पर पोस्ट कर रहे हैं उनके अकाउंट पर क्लिक करके आप यह भी पता लगा सकते हैं कि वह किसके समर्थक हैं? हादसे को साजिश करार देने का उद्देश्य सरकार को बचाना भी हो सकता है। क्योंकि एक महीने में दो-दो रेल हादसों होना सिस्टम पर सवाल ज़रूर खड़े करता है।