

Extradition Of Financial Offenders And Terrorist Suspects: भारत में अपराध करके विदेशों में ऐश करने वाले भगोड़ों के दिन अब लद चुके हैं। केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कूटनीतिक और कानूनी ताकत का लोहा मनवाते हुए एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। गृह मंत्रालय द्वारा साझा किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में भारत सरकार ने दुनिया के 36 अलग-अलग देशों से 274 भगोड़ों को वापस लाने में सफलता पाई है। यह कार्रवाई केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मिशन बन चुका है।
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि 2021 से लेकर अब तक प्रत्यर्पण और निर्वासन की कोशिशों में अभूतपूर्व तेजी आई है। गृह मंत्री अमित शाह के स्पष्ट निर्देशों के बाद, भगोड़े अपराधियों को भारत की आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती माना गया है। यही कारण है कि अब दुनिया के किसी भी कोने में छिपे अपराधियों का पीछा करना सरकार की 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' बन गया है।
एक समय था जब भारत का प्रत्यर्पण ढांचा पुरानी प्रक्रियाओं और कमजोर तालमेल की वजह से सुस्त माना जाता था। प्रवक्ता के अनुसार, 2014 से पहले भारत हर साल औसतन केवल 4 से 6 भगोड़ों को ही वापस ला पाता था। उस वक्त भारत की केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि थी और 110 से अधिक अनुरोध लंबित थे। लेकिन अब तकनीक-आधारित ट्रैकिंग, खुफिया समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए इस प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया गया है।
भगोड़े आर्थिक अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए 2018 में 'फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट' लागू किया गया। इस कानून ने अधिकारियों को देश छोड़कर भागने वालों की संपत्तियां कुर्क करने और जब्त करने की खुली छूट दी। आंकड़ों की मानें तो सख्त कानूनी कार्रवाई के चलते 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
भारत अब केवल द्विपक्षीय संधियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि इंटरपोल के जरिए भी शिकंजा कस रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी करने की रफ्तार में भारी उछाल आया है:
2022: 40 नोटिस
2023: 100 नोटिस
2024: 107 नोटिस
2026 (अब तक): 182 नोटिस
पिछले तीन सालों में कुल 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं, जो भारत की आक्रामक रणनीति को दर्शाता है।
हालांकि 274 भगोड़े वापस लाए जा चुके हैं, लेकिन सरकार का मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है। भारत की लिस्ट में अभी भी कई 'हाई-प्रोफाइल' नाम शामिल हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी है। इनमें दाऊद इब्राहिम, विजय माल्या, ललित मोदी, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। केंद्र सरकार इन अपराधियों को भारतीय कानून के कठघरे में खड़ा करने के लिए लगातार अंतरराष्ट्रीय दबाव और कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर रही है।