6 साल का लंबा इंतजार खत्म! लिपुलेख दर्रे से कल फिर शुरू होगा India-China Trade, तिब्बत जाएंगे भारतीय व्यापारी

India-China Trade: भारत और चीन के बीच उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से सीमा व्यापार 6 साल बाद एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। 26 जून को भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत के लिए रवाना होगा।
India China Trade: Border Trade Resumes At Lipulekh Pass After Six Years Wait Now
भारत और चीन के बीच उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से सीमा व्यापार (सोर्स-सोशल मीडिया)
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India-China Trade Resumes At Lipulekh Pass: भारत और चीन के बीच उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से सीमा व्यापार 6 साल बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। 26 जून को भारतीय व्यापारियों का पहला दल पड़ोसी क्षेत्र तिब्बत के लिए पूरे उत्साह के साथ रवाना होगा। प्रशासन ने इस ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यापार को सफल बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। गुंजी में कस्टम कार्यालय भी खोला गया है और सभी व्यापारियों ने अपना जरूरी सामान लिपुलेख दर्रे के पास स्थित बड़े गोदामों में पहुंचा दिया है।

प्रशासन के अनुसार पहले चरण में कुल 26 व्यापार पास जारी किए गए हैं जिनमें 17 व्यापारी और 9 सहायक शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक अब तक 103 से अधिक व्यापारियों ने आवेदन किया है और जल्द ही दूसरे चरण में 25 और व्यापारियों को पास जारी होंगे। पहले जहां सामान खच्चरों और याक के जरिए ले जाया जाता था वहीं अब सड़क संपर्क बेहतर होने से अधिकतर यात्रा वाहनों के जरिए पूरी की जाएगी। इससे व्यापारियों का काफी समय बचेगा और लागत भी कम होगी।

नेपाल ने सीमा विवाद को दी हवा

व्यापार की इस नई शुरुआत ने एक बार फिर नेपाल के साथ पुराने सीमा विवाद को हवा दे दी है और उसने आपत्ति जताई है। लिपुलेख दर्रा भारत, चीन और नेपाल के त्रि-जंक्शन के पास स्थित है और नेपाल इस इलाके पर अपना दावा करता रहा है। नेपाल का कहना है कि भारत और चीन ने सीमा व्यापार बहाल करने से पहले उससे कोई परामर्श नहीं किया।

नेपाल का पुराना विरोध और दावा

नेपाल ने पहले भी 2015 और 2020 में भारत-चीन के लिपुलेख से जुड़े समझौतों पर अपना बहुत ही कड़ा औपचारिक विरोध दर्ज कराया था। नेपाल की संसद ने इसे अपनी संप्रभुता से जुड़ा एक बहुत ही गंभीर मुद्दा बताया था जो आज भी विवाद का बड़ा कारण है। वह लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्र को अपना हिस्सा मानता है जिसे भारत पूरी तरह से खारिज कर चुका है।

भारत का रुख और ऐतिहासिक व्यापार

भारत का स्पष्ट रूप से कहना है कि लिपुलेख पूरी तरह से उत्तराखंड का अभिन्न हिस्सा है और यह हमारी संप्रभुता है। नई दिल्ली इस व्यापार को एक बहुत ही ऐतिहासिक और पारंपरिक गतिविधि मानती है जो सीमावर्ती समुदायों की अहम आजीविका से जुड़ी है। सीमा से जुड़े मुद्दों का समाधान भारत और नेपाल के बीच सिर्फ द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही पूरी तरह से होना चाहिए।

संबंधों में नरमी का सकारात्मक संकेत

लिपुलेख व्यापार की यह अहम बहाली भारत और चीन के बीच संबंधों में धीरे-धीरे आ रही नरमी का एक बहुत ही बड़ा संकेत है। कोविड महामारी और 2020 के सीमा तनाव के बाद दोनों देश व्यापार और संपर्क बहाल करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। व्यापार शुरू होने से सभी सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को बहुत ही बड़ा फायदा मिलने की पूरी उम्मीद है।

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