

How many Government School Closed in Modi Tenure: देश के भीतर एक के बाद एक पेपर लीक की घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। वहीं, सरकारी शैक्षणिक संस्थाओं की तुलना में तेजी से बढ़ते प्राइवेट संस्थानों की संख्या भी लोगों के लिए चिंता का विषय बन रहा है। लोगों का ऐसा कहना है कि शिक्षा का बाजारीकरण होने से पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर संसद से लेकर नीति आयोग की हालिया रिपोर्टों में एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक (2014-15 से 2024-25) के दौरान भारत में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में बड़ा फेरबदल हुआ है। जहां एक तरफ हजारों सरकारी स्कूलों पर ताला लटका है या उन्हें दूसरे स्कूलों में मर्ज (विलय) कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूलों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी और नीति आयोग की लेटेस्ट रिपोर्ट 'स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया' के अनुसार, वर्ष 2014-15 में देश में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या 11,07,101 थी, जो वर्ष 2024-25 तक घटकर लगभग 10,13,000 रह गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि पिछले 10 वर्षों में देश भर में लगभग 94,000 सरकारी स्कूल कम हुए हैं, जो कि 8% की गिरावट को दर्शाता है। इसके ठीक उलट, इसी समय के दौरान प्राइवेट स्कूलों की संख्या 2.88 लाख से बढ़कर 3.39 लाख हो गई है, जिसमें लगभग 14.9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकारी स्कूलों के बंद होने या विलय होने की इस रफ्तार में देश के दो बड़े राज्य सबसे आगे रहे हैं। कुल बंद हुए स्कूलों में से अकेले 60.9% स्कूल उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से हैं। इस लिस्ट में मध्य प्रदेश सबसे आगे है, जहां सरकारी स्कूलों की संख्या में 24.1% की भारी गिरावट आई है। यह आंकड़ा 2014-15 के 1,21,849 स्कूलों से घटकर अब 92,439 रह गया है, जो कि 29,410 स्कूलों की कमी दर्शाता है। इसके अलावा यूपी में सरकारी स्कूलों की संख्या 1,62,228 से घटकर 1,37,102 रह गई है, जो 25,126 स्कूलों की कमी को उजागर करता है।हालांकि, इसी दौरान उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 19,305 नए प्राइवेट स्कूल भी खुले हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलावा ओड़िशा में 17.1%, अरुणाचल प्रदेश में 16.4%, और झारखंड में 13.4% सरकारी स्कूल कम हुए हैं। इस विपरीत लहर के बीच बिहार में सरकारी स्कूलों की संख्या में 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 74,291 से बढ़कर 78,120 हो गई है। बदा दें कि बिहार उन राज्यों में से एक जहां, आज भी कई इलाकों में प्राथमिक स्कूल की समस्या बनी हुई है।
सरकार और नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल बंद होने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
नीति आयोग की रिपोर्ट में एक चिंताजनक बात यह सामने आई है कि स्कूलों की संख्या घटने के साथ ही पिछले एक दशक में कुल बच्चों के नामांकन में 2.26 करोड़ की गिरावट आई है। वर्ष 2014-15 में जहां 26.95 करोड़ बच्चे स्कूलों में नामांकित थे, वहीं यह आंकड़ा अब घटकर 24.69 करोड़ रह गया है। सबसे ज्यादा असर सेकेंडरी स्तर (कक्षा 9वीं और 10वीं) पर देखा गया है, जहां ड्रॉपआउट रेट सबसे अधिक है।
एक्सपर्ट का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में प्राथमिक स्कूलों के बंद होने या दूर के स्कूलों में विलय होने से गरीब परिवारों के बच्चों, विशेषकर लड़कियों के लिए शिक्षा तक पहुंच कठिन और खर्चीली हो गई है। इसी वजह से ज्यादा संख्या में छात्र और छात्राओं ने स्कूल जाना छोड़ दिया।