पुलिस Vs पुलिस: AI समिट में 'शर्टलेस' प्रदर्शन पर हाईवोल्टेज ड्रामा, दिल्ली पुलिस पर लगा किडनैपिंग का आरोप

Delhi Vs Himachal Police: AI समिट में प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने पहुँची दिल्ली पुलिस की हिमाचल पुलिस से भिड़ंत हो गई। कोर्ट के दखल के बाद ही यह विवाद सुलझ सका।
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आपस में भिड़ गए दिल्ली और हिमाचल पुलिस के कर्मी, फोटो- सोशल मीडिया
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Delhi Police Vs Himachal Police: राजधानी दिल्ली में आयोजित AI समिट के दौरान शर्ट उतारकर प्रदर्शन करना यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को भारी पड़ गया है। आरोपियों को पकड़ने हिमाचल पहुंची दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को वहां की स्थानीय पुलिस ने ही रोक लिया, जिसके बाद दो राज्यों की पुलिस के बीच सड़क पर जबरदस्त खींचतान देखने को मिली।

इस पूरे विवाद की जड़ 20 फरवरी को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'AI इम्पैक्ट समिट' से जुड़ी है। इस हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में, जहां दुनिया भर के प्रतिनिधि मौजूद थे, यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा घेरा तोड़कर शर्ट उतारकर विरोध-प्रदर्शन किया था। दिल्ली पुलिस ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लेते हुए इसे सुरक्षा में सेंध और देश विरोधी नारों से जोड़कर कई एफआईआर दर्ज कीं। इस मामले में अब तक भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब और पूर्व प्रवक्ता भूदेव शर्मा सहित कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

रोहड़ू के रिजॉर्ट में 'बिना सूचना' की छापेमारी

ताजा मामला तब शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की एक टीम (जिसमें करीब 15-20 अधिकारी शामिल थे) आरोपियों की तलाश में हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू पहुंची। टीम ने वहां के एक रिजॉर्ट से तीन यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं- सौरभ, सिद्धार्थ और अरबाज को हिरासत में लिया। आरोपियों को गिरफ्तार कर जब दिल्ली पुलिस की टीम वापस लौट रही थी, तब उन्हें शिमला के पास शोघी बैरियर और सोलन के धरमपुर में हिमाचल पुलिस ने नाका लगाकर रोक लिया।

किडनैपिंग का आरोप और नेशनल हाईवे पर भिड़ंत

हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। स्थानीय पुलिस का दावा था कि दिल्ली पुलिस के जवान सादे कपड़ों में थे और उन्होंने स्थानीय थाने को सूचित किए बिना 'अनजान लोगों' की तरह रिजॉर्ट से तीन युवकों को जबरदस्ती उठा लिया। शिमला पुलिस ने इसे 'किडनैपिंग' (अपहरण) का मामला करार दिया। विवाद तब और बढ़ गया जब यह आरोप लगा कि दिल्ली पुलिस ने रिजॉर्ट से सीसीटीवी (CCTV) और डीवीआर (DVR) बिना किसी कानूनी रसीद या मेमो के जब्त कर लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में शिमला पुलिस के जवान एनएच-5 पर दिल्ली पुलिस की गाड़ियों को रोकते और उनके साथ तीखी बहस करते नजर आए। हिमाचल पुलिस का कहना था कि केवल तीन जवान ही आरोपियों को ले जा सकते हैं, बाकी को जांच में शामिल होने के लिए रुकना होगा।

कोर्ट में अंत और राजनीतिक रंग

24 घंटे चले इस हाईवोल्टेज ड्रामे का अंत आखिरकार अदालत के हस्तक्षेप से हुआ। शिमला की एक स्थानीय अदालत (ACJM-II एकांश कपिल की कोर्ट) में दिल्ली पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड की अर्जी दी। कोर्ट ने कानूनी प्रक्रियाओं को देखने के बाद आरोपियों को दिल्ली ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर लिया। दिल्ली पुलिस के वकील नंद लाल ने पुष्टि की कि आरोपियों को अब दिल्ली में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।

इस घटना ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस घटना को 'दुर्भाग्यपूर्ण' और संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है। वहीं, दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना है कि आरोपियों को हिमाचल में छिपाया जाना एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। दो राज्यों की पुलिस के बीच हुई इस खींचतान ने अंतर-राज्यीय समन्वय और कानूनी प्रोटोकॉल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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