पहला असर वंचित, दलित व गरीब वर्ग का वोटर शामिल है जो SIR में औपचारिक दस्तावेज नहीं दे पाया और नाम कट गया। दूसरा मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर जो राजद और कांग्रेस गठजोड़ का खास वोट बैंक है। इसके अलावा बिहार 2020 के चुनाव में कुल मतदान 54.63 फीसदी था जो प्रभावित हो सकता है।