यहां देखने को मिलती है राजनीति और समाजसेवा की खूबसूरत कारीगरी

यहां देखने को मिलती है राजनीति और समाजसेवा की खूबसूरत कारीगरी
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यों तो आज हर इंसान व्यस्त है। दूसरों के लिए तो दूर, खुद के लिए भी उपयुक्त समय की कमी आज देखने को मिल रही है। ऐसे में यदि अपनी दिनचर्या से थोड़ा-बहुत समय भी किसी के काम आ जाए, तो यह किसी मिसाल से कम नहीं है। और फिर बात एक बार की नहीं है, यदि आप परंपरा के रूप में किसी की सेवा करने में सक्षम हैं, तो यकीन मानिए, आप किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।

ठीक ऐसी ही मिसाल कायम करते हुए राजनीति और समाजसेवा की खूबसूरत कारीगरी को एक-दो नहीं, बल्कि कई वर्षों से अंजाम दे रहे हैं देश के जाने-माने राजनीतिज्ञ बैजयंत 'जय' पांडा। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और असम व दिल्ली के पार्टी प्रभारी बैजयंत खुद में समाजसेवा का भाव बखूबी रखते हैं। उन्होंने समाज के प्रति अपने निष्ठा भाव को स्वदेशी सोशल मीडिया मंच, कू ऐप के माध्यम से बयान किया है। सोशल मीडिया पर बहुत ही खूबसूरत पोस्ट करते हुए बैजयंत ने कहा है:

जैसा कि हर गर्मियों में पीढ़ियों से हमारा पारिवारिक रिवाज रहा है, इस महीने की शुरुआत से, ओडिशा और दिल्ली में मेरे घर-कार्यालयों के बाहर राहगीरों के लिए पानी और छाछ का दैनिक प्रावधान शुरू हुआ ?

Koo AppAs has been our family custom for generations every summer, from earlier this month, daily provisioning of water & dahi-water began for passersby outside my home-offices in Odisha & Delhi ? View attached media content - Baijayant ’Jay’ Panda (@pandajay) 25 Apr 2022

उन्होंने इस पोस्ट के साथ ही एक बेहद दिलचस्प वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें पास से निकलने वाले राहगीर साफ-सुथरे घड़ों में रखे पानी और छाछ से अपनी प्यास बुझाते दिखाई दे रहे हैं।

मानों तो यह पोस्ट अपने में बहुत कुछ कहती है और ना मानो तो कुछ भी नहीं। गर्मी के दिनों में जहाँ तपती धूप और जलता दिन गले को हर थोड़ी देर में सूखाने की वजह बन जाता है, ऐसे में यदि कोई एक गिलास पानी पिलाने वाला मिल जाए, तो आधी तकलीफें तो यों ही खत्म हो जाती हैं।

हर कोई इस आग उगलती गर्मी से बचना चाहता है, लेकिन काम की जिम्मेदारी और पेट का सवाल सारे जवाब खुद-ब-खुद ही दे जाते हैं। ऐसे में गर्मी के इन दिनों में हर वर्ष बैजयंत 'जय' पांडा ओडिशा और दिल्ली में अपने घर और कार्यालय के बाहर राहगीरों के लिए पानी और छाछ की व्यवस्था करते हैं।

खास बात यह है कि यह परंपरा उनके परिवार में कई पीढ़ियों से चली आ रही है, जो प्रत्यक्ष तौर पर पुण्य का काम है। कहा जाता है कि हर घर, समाज या धर्म की विशेष मान्यताएँ और परम्पराएँ होती है, जिनके कदमों पर चलकर ही समाज आगे बढ़ता है। बैजयंत 'जय' पांडा की पीढ़ी-दर-पीढ़ी से चली आ रही गर्मी के दिनों में पानी और छाछ से प्यास बुझाने की यह परंपरा वाकई में सराहनीय है।

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