

हैदराबादः भारत और पाकिस्तान के बीच अब डिप्लोमैटिक युद्ध चल रहा है। भारत ने पाकिस्तान को एक्सपोज करने के लिए सर्वदलीय सांसदों का प्रतिनिधि मंडल बनाया है, जो अलग-अलग देशों में जाकर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की पोल खोलेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में AIMIM सांसद असदुद्दीन औवैसी भी शामिल हैं। इसी को लेकर आज उन्होंने हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान पाकिस्तान को जमकर लताड़ा। साथ तुर्की की भी मजम्मत की।
तुर्की ने भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे सेमी वॉर के दौरान न सिर्फ पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया, बल्कि भारत पर अटैक के लिए ड्रोन भी मुहैया करवाए। हालांकि अब सीजफायर हो गया है, लेकिन बॉयकॉट तुर्की ट्रेंड कर रहा है।
भारत और तुर्की के साथ ऐतिहासिक रिश्ताः ओवैसी
तुर्की के बॉयकॉट पर बोलते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तुर्की को भारत के साथ उनके रिश्ते याद दिलाए। साथ ही ओवैसी ने कहा कि पाकिस्तान मानवता के लिए खतरा बन गया है, उसका इस्लाम से कोई-लेना देना नहीं। उन्होंने कहा कि तुर्की को पाकिस्तान का समर्थन करने अपने रुख का विचार करना चाहिए। तुर्की और भारत के बीच ऐतिहासिक रिश्ता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
तुर्की को याद दिलाने की जरूरत हम क्या हैं: असदुद्दीन ओवैसी
ओवैसी ने कहा कि हमें तुर्की की सरकार को याद दिलाना चाहिए कि वहां जो 'İşbank' है, उसके शुरुआती जमाकर्ता भारतीय हैं। आगे उन्होंने पाकिस्तान से अधिक मुसमलान भारत में रहते हैं। भारत में करीब 20 करोड़ से अधिक मुसलमान रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमें बताया चाहिए की पाकिस्तान ने पहलगाम में जो करवाया है, उसका इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है। हमें तुर्की को बार-बार याद दिलाने की जरूरत है कि भारत के मुसलमान खुदमुख्तार हैं और दुनिया में उनका सम्मान किया जाना चाहिए।
'हम पाकिस्तान के दूल्हा, इतना हैंडसम वहां कोई नहीं'
इस दौरान AIMIM प्रमुख ने पाकिस्तान की चुटकी भी ली। एक सवाल का जवाब देते हुए ओवैसी ने कहा कि हम पाकिस्तान के दूल्हा भाई, इतना हैंडसम वहां कोई नहीं। सब पाकिस्तानी मुझे सुनते रहें ज्ञान बढ़ेगा और अज्ञान खत्म होगी।
तुर्की का पर्यटन ध्वस्त
तुर्की द्वारा पाकिस्तान को भारत के खिलाफ ड्रोन दिए जाने से देश में रोष है, जिसके चलते कई भारतीय पर्यटन कंपनियों ने तुर्की की बुकिंग बंद कर दी है। इस बहिष्कार से तुर्की को भारतीय पर्यटकों से होने वाली लगभग 3000 करोड़ रुपये की वार्षिक आय का नुकसान हो सकता है, जबकि भारत ने भूकंप के समय तुर्की की मदद की थी।