

नई दिल्लीः केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंगलवार को लोकसभा में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024 पेश किया, जिससे 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' प्रस्ताव का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस प्रस्ताव का उद्देश्य देश भर में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराना है। इसके अलावा, विधि मंत्री ने दिन के कार्यक्रम के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम, 1963, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन करने के लिए विधेयक पेश करने की भी मांग की।
इन विधेयकों का उद्देश्य दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों को प्रस्तावित एक साथ चुनावों के साथ जोड़ना है। इस बीच, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने केंद्रीय मंत्री के कदम का विरोध करते हुए कहा, "संविधान की सातवीं अनुसूची से परे मूल संरचना सिद्धांत है, जो बताता है कि संविधान की कुछ विशेषताएं सदन की संशोधन शक्ति से परे हैं। आवश्यक विशेषताएं संघवाद और हमारे लोकतंत्र की संरचना हैं। इसलिए, कानून और न्याय मंत्री द्वारा पेश किए गए विधेयक संविधान की मूल संरचना पर एक पूर्ण हमला हैं और सदन की विधायी क्षमता से परे हैं।"
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहा, "मैं संविधान के 129वें संशोधन अधिनियम का विरोध करने के लिए खड़ा हूं। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि दो दिन पहले संविधान को बचाने की गौरवशाली परंपरा को बनाए रखने में कोई कसर क्यों नहीं छोड़ी गई। दो दिन के भीतर संविधान की मूल भावना और ढांचे को कमजोर करने के लिए यह संविधान संशोधन विधेयक लाया गया है। मैं मनीष तिवारी से सहमत हूं और अपनी पार्टी और अपने नेता अखिलेश यादव की ओर से मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि उस समय हमारे संविधान निर्माताओं से ज्यादा विद्वान कोई नहीं था। यहां तक कि इस सदन में भी उनसे ज्यादा विद्वान कोई नहीं है।
सितंबर में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक साथ चुनाव कराने संबंधी उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। समिति की रिपोर्ट में दो चरणों में एक साथ चुनाव कराने की रूपरेखा तैयार की गई थी। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना और आम चुनाव के 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव (पंचायत और नगर निगम चुनाव) कराना। पैनल ने सभी चुनावों के लिए एक समान मतदाता सूची की भी सिफारिश की। हालांकि, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एससीपी) के सांसदों सहित कई विपक्षी नेताओं ने "एक राष्ट्र, एक चुनाव" विधेयक पर अपना कड़ा विरोध व्यक्त किया।