

Amit Shah Parliament Absence Controversy: दिल्ली में छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई और अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। विपक्ष लगातार संसद में दोनों मुद्दों पर सरकार को घेरने में लगा हुआ है। इसके चलते 20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में ऐसा एक भी दिन नहीं बीता, जब सदन की कार्यवाही बिना हंगामे के 10 मिनट भी ठीक से चल पाई हो। इसी बीच विपक्ष के निशाने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आ गए हैं।
विपक्षी नेता लगातार सदन की कार्यवाही में गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि अमित शाह दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई से जुड़े सवालों के जवाब देने से बचने के लिए छिप रहे हैं। ऐसे में सवाल आता है कि विपक्ष के दावों में कितना दम है? और क्या सच में अमित शाह सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हो रहे हैं? संसद में उपस्थिति को लेकर क्या नियम हैं?
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल ही में सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल किए जाने के मुद्दे से बच नहीं सकती। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को संसद में आकर इस पर जवाब देना होगा।
खरगे ने इसके अलावा राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सरकार को बताना होगा कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे की चोरी कैसे हुई, जबकि मंदिर ट्रस्ट प्रधानमंत्री की निगरानी में था। विपक्ष लगातार इन मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ संसद भवन परिसर के बाहर प्रदर्शन कर रहा है।
मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सदन में अमित शाह की गैरहाजिरी को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 30 जुलाई को एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि संसद से अमित शाह की अनुपस्थिति 'दोष की बू' देती है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर अभी तक संसद को संबोधित क्यों नहीं किया है। अमित शाह संसद में आकर छात्रों के खिलाफ हुई क्रूर हिंसा के बारे में स्पष्टीकरण देने से इतना क्यों डरते हैं?
कांग्रेस के अलावा दूसरे विपक्षी नेता भी अमित शाह की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। बुधवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा और तीखा हमला बोला। संसद के मानसून सत्र के दौरान अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति को लेकर राउत ने तंजिया लहजे में उन्हें ‘लापता’ घोषित कर दिया।
राउत ने कहा कि देश के गृह मंत्री संसद परिसर में तो कभी-कभी नजर आते हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा, लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही उन्हें ढूंढ रही हैं, लेकिन वे मिल नहीं रहे। अब हमने ‘गुमशुदा की तलाश’ के पोस्टर तैयार किए हैं। हम पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराएंगे कि देश के गृह मंत्री लापता हैं। कृपया उन्हें ढूंढकर सदन में लाएं।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101(4) के मुताबिक, अगर कोई सांसद संसद से बिना अनुमति के 60 दिन या उससे अधिक अनुपस्थित रहता है, तो उसका संसदीय पद रिक्त घोषित किया जा सकता है। हालांकि, सत्र के दौरान सांसद पर ऐसा कोई नियम लागू नहीं होता। सांसद चाहे तो पूरे सत्र के दौरान अनुपस्थित रह सकता है। इससे उसकी सदस्यता पर कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि, अगर सांसद सत्र के अलावा 60 दिनों तक संसद की किसी बैठक में शामिल नहीं होता है, तो अलग-अलग सत्रों के बैठक दिवस भी इसमें जोड़े जा सकते हैं।
अमित शाह की सदन की कार्यवाही में शामिल होने की बात की जाए, तो वह 20 जुलाई को संसद की कार्यवाही में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने राज्यसभा में 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया था। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 का मकसद 1971 के कानून में संशोधन कर 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान कानूनी संरक्षण देना है।
विधेयक के मुताबिक, अगर कोई जानबूझकर 'वंदे मातरम्' के गायन के दौरान बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि यह राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए जरूरी कदम है, जबकि विपक्ष के कुछ दलों ने इसे अभिव्यक्ति और धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर आपत्ति जताई है।
अमित शाह आखिरी बार 4 अगस्त को संसद भवन परिसर में नजर आए थे। इस दौरान उन्होंने संसद परिसर में आयोजित एनडीए संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक में हिस्सा लिया था।हालांकि वो सत्र में शामिल नहीं हुए थे।