तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की शुरू

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नई दिल्ली:उच्चतम न्यायालय की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर साक्ष्य गढ़ने के मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत की मांग करने वाली कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर शनिवार रात सुनवाई शुरू कर दी। सीतलवाड़ को अंतरिम राहत देने पर दो न्यायाधीशों की अवकाश पीठ में मतभेद के बाद न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ विशेष बैठक में मामले की सुनवाई कर रही है।

इससे पहले, शाम के समय हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्र की पीठ ने कहा, ‘‘इस विशेष अनुमति याचिका पर कुछ समय तक सुनवाई करने के बाद, हम अंतरिम राहत के निवेदन पर निर्णय लेते समय सहमत होने में असमर्थ हैं।

इसलिए, यह उचित होगा यदि, भारत के माननीय प्रधान न्यायाधीश के आदेशों के तहत, यह याचिका उपयुक्त बड़ी पीठ के समक्ष रखी जाए।'' पीठ ने कहा, "रजिस्ट्रार (न्यायिक) को यह आदेश तुरंत प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया जाता है।"

गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा नियमित जमानत याचिका खारिज किए जाने के तुरंत बाद सीतलवाड़ ने राहत के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति निर्झर देसाई ने सीतलवाड़ को तुरंत आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जो पिछले साल सितंबर में शीर्ष अदालत से अंतरिम जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर हैं। उच्चतम न्यायालय गर्मी की छुट्टियों के कारण बंद है और सोमवार को फिर से खुलेगा। (एजेंसी)

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