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स्मिता पाटिल ने अपनी एक्टिंग से हिंदी सिनेमा में खास पहचान बनाकर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीता।
राज बब्बर के साथ उनकी पर्सनल लाइफ हमेशा चर्चा में रही, और बेटे प्रतीक बब्बर उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बने।
महज 31 साल की उम्र में स्मिता पाटिल का निधन हो गया, लेकिन उनकी शानदार फिल्में आज भी उन्हें जीवित रखती हैं।
Smita Patil Life Story: भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में जब भी उन एक्ट्रेसेस का जिक्र होगा जिन्होंने अपनी कला से बड़े पर्दे पर अमिट छाप छोड़ी, तो स्मिता पाटिल का नाम सबसे ऊपर आएगा। कम उम्र में ही इस दुनिया को अलविदा कह जाने वाली इस महान एक्ट्रेस ने अपनी एक्टिंग के दम पर जो मुकाम हासिल किया, वह आज भी नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक प्रेरणा है।
राजनीति और कला से जुड़े परिवार में जन्मी स्मिता ने बहुत ही कम समय में फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक ऐसी अलग पहचान बनाई जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जो हर किसी को हैरान और भावुक कर देती हैं।
स्मिता पाटिल का जन्म 17 अक्टूबर 1955 को हुआ था और उनके घर का माहौल राजनीतिक और सामाजिक रूप से काफी एक्टिव था। इसके बाद भी उनका रुझान हमेशा से कला, रंगमंच और एक्टिंग की तरफ रहा।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी और उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए फेमस फिल्मकार श्याम बेनेगल ने उन्हें अपनी फिल्म चरणदास चोर में मौका दिया। इस तरह उन्होंने साल 1975 में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा और अपनी पहली ही फिल्म से यह साबित कर दिया कि वे लंबी रेस का घोड़ा साबित होने वाली हैं।
बड़े पर्दे पर हमेशा सीरियस और संजीदा रोल निभाने वाली स्मिता रियल लाइफ में बेहद जिंदादिल और खुशमिजाज इंसान थीं। हालांकि उनकी पर्सनल लाइफ हमेशा से ही काफी चर्चा में रही और उन्होंने अपने जीवन से जुड़े फैसले अपनी शर्तों पर लिए। फिल्म भीगी पलके की शूटिंग के दौरान उनकी नजदीकियां एक्टर राज बब्बर से बढ़ीं जो पहले से ही शादीशुदा थे।
दोनों का यह रिश्ता उस दौर में काफी विवादों में रहा और इस कदम की वजह से उनके माता-पिता भी उनसे नाराज हो गए थे, लेकिन उन्होंने कभी अपने फैसलों से पीछे हटने का रास्ता नहीं चुना।
उन्होंने अपने छोटे से फिल्मी सफर में केवल कमर्शियल फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि आर्ट सिनेमा को एक नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए महिलाओं के अधिकारों, संघर्षों और उनकी असली स्थिति को बड़े पर्दे पर बेहद खूबसूरती से उकेरा।
उनकी बेहतरीन एक्टिंग के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री अवॉर्ड से भी नवाजा गया। बंगाली, गुजराती, मराठी, मलयालम और कन्नड़ सिनेमा में भी उनके काम को आज भी याद किया जाता है और वे हर भाषा के निर्देशकों की पहली पसंद हुआ करती थीं।
स्मिता पाटिल की लाइफ का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि महज 31 साल की छोटी उम्र में उनका निधन हो गया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। निधन से कुछ समय पहले उन्होंने अपने एक करीबी से बातचीत में यह इच्छा जताई थी कि वे चाहती हैं कि जब वे दुल्हन की तरह जाएं तो उनका श्रृंगार किया जाए।
उनके इस आखिरी और मार्मिक इच्छा का सम्मान करते हुए उनके मेकअप आर्टिस्ट ने उन्हें किसी दुल्हन की तरह ही अंतिम विदाई दी थी। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और उनका बेमिसाल एक्टिंग हमेशा हमारे दिलों में अमर रहेगा।