

Highlights
शम्मी कपूर की सिगरेट पीने की आदत का हैरान करने वाला किस्सा।
एक दिन में 100 से ज्यादा सिगरेट पीने का दावा।
संत से मुलाकात को जिंदगी में बदलाव से जोड़कर देखा जाता है।
शम्मी कपूर की जिंदगी का आध्यात्मिक पहलू भी है दिलचस्प।
Shammi Kapoor Life Story: बॉलीवुड के 'रॉकस्टार' कहे जाने वाले शम्मी कपूर ने अपनी एक्टिंग और बेबाक अंदाज से दशकों तक सिनेमा प्रेमियों के दिलों पर राज किया। पर्दे पर हमेशा ऊर्जा से भरपूर दिखने वाले इस एक्टर की पर्सनल जिंदगी के कई ऐसे पहलू हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
हाल ही में उनकी पत्नी नीला देवी ने एक खास बातचीत में उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी अनसुनी और हैरान करने वाली बातें शेयर की हैं, जो उनके फैंस को एक नया नजरिया देती हैं।
शादी के शुरुआती दौर में शम्मी कपूर का गुस्सा और उनकी आदतें उनकी फैमिली के लिए भी चिंता का विषय थीं। नीला देवी ने बताया कि वह छोटी-छोटी बातों पर झल्ला जाते थे और उनका गुस्सा बहुत तेज था।
उस दौर में वह दिनभर में करीब 100 सिगरेट पी जाते थे और उन्हें शराब पीने का भी बेहद शौक था। जबकि वह खुद अपनी गलतियों को लेकर सजग भी रहते थे और अक्सर अगली सुबह अपनी पत्नी से पूछते थे कि पिछली रात पार्टी में क्या हुआ था, ताकि वह खुद में सुधार ला सकें।
साल 1969 में नीला देवी के साथ शादी होने के बाद शम्मी कपूर की जिंदगी में धीरे-धीरे ठहराव आने लगा। शादी के ठीक 1 साल बाद यानी 1970 में उनके पिता पृथ्वीराज कपूर और उनकी मां की तबीयत अचानक खराब हो गई।
ऐसे मुश्किल समय में एक्टर ने अपने काम से दूरी बनाने का फैसला किया और लगातार 2 साल तक फिल्मों से दूर रहकर अपने माता-पिता की सेवा की। इस दौरान उनके भाई राज कपूर और शशि कपूर अपने फिल्मों के काम में बिजी थे, लेकिन शम्मी जी ने अपने परिवार को सबसे ऊपर रखा और माता-पिता के बेहद करीब आ गए।
माता-पिता के निधन के बाद शम्मी कपूर गहरे सदमे में थे। इसी दौरान वह मॉरीशस गए, जहां उनकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई जिसने उनके जीने का अंदाज ही बदल कर रख दिया। वह शख्स कोई और नहीं बल्कि हैदाखान वाले बाबा थे, जिन्हें लोग भोले बाबा के नाम से भी जानते हैं।
शम्मी कपूर की पत्नी नीला देवी बताती हैं कि शम्मी जी ने जीवन में कभी किसी आध्यात्मिक गुरु में भरोसा नहीं किया था, लेकिन बाबाजी से मिलने के बाद उनके अंदर एक अभूतपूर्व बदलाव आया। इसके बाद से उन्होंने माथे पर टीका लगाना शुरू कर दिया और बाबाजी के साथ उनकी हर यात्रा में शामिल होने लगे।
शम्मी कपूर को मॉर्डन तकनीक बहुत पसंद थी और जब भारत में कंप्यूटर का दौर आया, तो वह घंटों उसके सामने समय बिताने लगे। हैरानी की बात यह है कि कंप्यूटर के लिए उनकी इस दीवानगी ने उनकी सालों पुरानी सिगरेट पीने की लत को हमेशा के लिए छुड़ा दिया।
हालांकि लगातार और ज्यादा सिगरेट पीने के कारण उनके फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंच चुका था, जिसके चलते साल 2003 में उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई और उन्हें लंबे समय तक हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर रहना पड़ा।
जिंदगी के एक पड़ाव पर जब शम्मी कपूर को फिल्म जमीर में एक्टिंग का मौका मिला, तो वह काफी सोच में पड़ गए थे। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे और एक्ट्रेस सायरा बानो उनकी बेटी का रोल निभा रही थीं।
शम्मी जी इस बात को लेकर परेशान थे कि जिस सायरा बानो के साथ उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में बतौर रोमांटिक हीरो पर्दे पर काम किया था, अब वह उनके पिता का रोल कैसे निभाएं। हालांकि पत्नी से लंबी बातचीत के बाद उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया और अपने एक्टिंग के नए अध्याय की शुरुआत की।